बीएनएन डेस्कः दुनिया भर में म्यांमार के सैन्य तख्तापलट का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। म्यांमार राजनीतिक संकट को लेकर होने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विशेष बैठक से पहले जहां अमेरिका नेम्यां मार के व्या पार पर रोकलगाते दो कंपनियों को ब्लैपक लिस्ट कर दिया है वहीं यूट्यूब ने म्यांमार सेना के पांच चैनलों को बंद कर दिया है। म्यां मार की सैन्ये सरकार पर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका ने उसके म्यां मार इकनॉमिक कॉरपोरेशन और म्यां मार इकनॉमिक होल्डिंग पब्लिक कंपनी को व्यालपार के लिए ब्लै क लिस्टे कर दिया है।
यूएस कॉमर्स डिपार्टमेंट ने इसके अलावा म्यांहमार के रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय को भी इसमें शामिल किया है। अमेरिका ने ये फैसला वहां पर लोकतांत्रिक सत्ताष की बहाली की मांग करने वालों सख्तीर दिखाने, गोली चलाने की घटना के बाद 38 लोगों की मौत के बाद लिया है। अमेरिका की तरफ से जो प्रतिबंध लगाए गए हैं उनमें ब्यू।रो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्यो रिटी (बीआईएस) ने म्यां मार की मिलिट्री और सिक्यो रिटी सर्विस को वहां पर सेना द्वारा किए गए तख्ता पलट में भागीदार माना है। अमेरिका ने अपने ताजा फैसले में म्यांपमार से होने वाले एक्सयपोर्ट और इंपोर्ट पर भी रोक लगा दी है। अमेरिका ने एक बार फिर से सेना द्वारा तख्ताुपलट की कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा है कि वो लोकतंत्र का सम्माैन करते हुए म्यांसमार की चुनी हुई सूकी की सरकार को दोबारा बहाल करे।
उधर, यूट्यूब ने कहा कि वह अन्य ऐसी समाग्री की भी जांच कर रहा है जो उसके नियमों का उल्लंघन करती हैं। इससे पहले फेसबुक ने घोषणा की थी कि उसने म्यांमा की सेना से संबंधित सभी पेजों को अपनी साइट और इंस्टाग्राम से भी हटा दिया है। अब यूट्यूब ने भी ऐसा ही निर्णय लिया है। गौरतलब है कि म्यांमा में सेना ने एक फरवरी को तख्तापलट कर देश की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी। सेना का कहना है कि आंग सान सू ची की निर्वाचित असैन्य सरकार को हटाने का एक कारण यह है कि वह व्यापक चुनावी अनियमितताओं के आरोपों की ठीक से जांच करने में विफल रही है।
बता दें कि अमेरिका समेत संयुक्ता राष्ट्रह के महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने बुधवार की घटना को खूनी दिन कहकर संबोधित किया था। इसी तरह से संयुक्तल राष्ट्रा की विशेष दूत क्रिस्टीइना बर्गेनर ने भी इसको खूनी दिन बताते हुए कहा कि ये सबसे अधिक दुखद घटना है। म्यांहमार में तख्ताच पलट के बाद क्रिस्टी ना ने म्यांनमार के डिप्टीत मिलिट्री चीफ से बात भी की थी। हालांकि उन्हेंत अपने बात का सही जवाब नहीं मिला.

