हैवानों ने दो महीने में एक बार नहीं, दो बार नहीं पुरे सात बार नन्ही सी जान को बेच डाला. ना भगवान का डर रहा ना खुदा का. जो भी इस मामले में आया सभी ने इंसानियत का क़त्ल किया. सत्तर हजार से बिकते बिकते नन्ही जान का अंतिम सौदा ढाई लाख रुपयों में हुआ. मामला आन्ध्र प्रदेश के मंगल गिरी का है. बच्ची का पहली बार सौदा मंगलगिरी में हुआ था जबकि आखिरी बार सौदा विजयवाड़ा में किया गया था. फिलहाल बच्ची को उसकी मां के पास पहुंचा दिया गया है. पुलिस ने मामले में मुख्या आरोपी नवजात लडकी के पिता 11 लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस को मामले की जानकारी नवजात की माँ और दादी की शिकायत के बाद हुई. पुलिस मामले की छानबीन में लगी है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार आंध्रप्रदेश के मंगलगिरी पुलिस स्टेशन के डीएसपी जे रामबाबू ने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से बताया कि बच्ची को उसके पिता मनोज ने 70 हजार रुपये में बेच दिया था. तीन महीने पहले उसे एक बच्ची हुई थी. उसने बच्ची को नालगोंडा जिले के दमराचारला मंडल के कोंडाप्रोलू गांव की एक विवाहित महिला मेघवत गायत्री उर्फ सरस्वती को 70 हजार रुपये में बेचा. बाद में, मेघावत गायत्री, जिसने बच्चे को खरीदा था, ने उसे 1,20,000 रुपये में हैदराबाद के दिलसुख नगर के भुक्या बलवर्तिराजू को बेचा, जिसने बदले में शिशु को नूरजहाँ को 1,87,000 रुपये में बेच दिया. बच्चे को एक बार फिर नूरजहां ने खम्मम जिले के अनुभवु उदय किरण की मदद से 1,90,000 रुपये में बेच दिया. उसने उसे विजयवाड़ा बेंज सर्कल के पडाला श्रावणी को 2,00,000 रुपये में बेच दिया. यह आगे भी जारी रहा, पडाला श्रावणी ने बच्चे को गोलपुडी, विजयवाड़ा की गरिकमुक्कू विजयलक्ष्मी को 2,20,000 रुपये में बेच दिया, जिसने आखिरकार बच्चे को पूर्वी गोदावरी जिले के एलुरु के वार्रे रमेश को 2,50,000 रुपये में बेच दिया था.

