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आत्मनिर्भरता की बुलंदियों को छूने में पुरुषों को पछाड़ महिलाएं ,पुरुषों के वर्चस्व वाले फर्नीचर निर्माण के धंधे में भी लगाई छलांग

by bnnbharat.com
March 6, 2021
in समाचार
आत्मनिर्भरता की बुलंदियों को छूने में पुरुषों को पछाड़ महिलाएं ,पुरुषों के वर्चस्व वाले फर्नीचर निर्माण के धंधे में भी लगाई छलांग
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चतरा: जब अपने आशियाने की बात हो तो भला फर्नीचर की चर्चा ना हो यह कैसे हो सकता है. दरअसल हम बात कर रहे हैं चतरा जिले की जो अब तक फर्नीचर निर्माण के क्षेत्र में पुरुषों के वर्चस्व वाला व्यवसाय माना जाता रहा है. किन्तु अब यहां महिलाएं भी फर्नीचर निर्माण में बढ़-चढ़कर अपनी किस्मत आजमा रही है और पुरुषों के वर्चस्व को न सिर्फ चुनौती दे रही है. बल्कि मोदी के आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को भी जीवंत करने के अथक प्रयास में जुटी है.

 चतरा जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर सिमरिया प्रखंड के नक्सल प्रभावित ईचाक खुर्द गांव में अब पुरुषों की जगह महिलाएं लकड़ी के फर्नीचर निर्माण में अपने जौहर दिखाती आपको साफ नजर आएंगी. जेएसएलपीएस के आजीविका मिशन से जुड़ी गरीबी का दंश झेल रही है ये महिलाएं अब अन्य व्यवसाय के अलावे फर्नीचर बनाने के धंधे में भी अपना दम दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही और अपने हुनर के बलबूते आर्थिक रूप से भी  सशक्त हो रही हैं.

दूसरी ओर इन महिलाओं द्वारा कभी लकड़ी पर रांधा चलाकर तो कभी छेनी व हथोड़े समेत अन्य औजारों के सहारे लकड़ियों पर तरह-तरह के डिजाइन उकेर कर ड्रेसिंग, सोफा, अलमीरा, दरवाजा आदि कई चींजे तैयार की जा रही हैं जिसकी डिमांड दूर-दूर तक फैलने लगी है. गांव की महिलाएं बताती हैं कि पहले घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. किंतु जेएसएलपीएस के आजीविका मिशन से जुड़कर उनकी जिंदगी संवर रही है.

 कहते हैं कि पतियों के लाख मनाही के बावजूद महिलाओं के जुनून तथा जिद ठानने की राह तब आसान हो गई जब झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की जेएसएलपीएस संस्था द्वारा इन्हें मंच प्रदान कर ऋण व प्रशिक्षण मुहैया कराया गया और आजीविका महिला समूह से जुड़ने के बाद इनकी किस्मत बदलने लगी. बीडीओ अमित कुमार मिश्रा ने भी उनके उत्साहवर्धक कार्यों की सराहना करते हुए लोगों से उन्हें सहयोग करने की अपील की.

अगर काम करने का जज्बा हो, तो स्वरोजगार की कोई कमी नहीं. वहीं आज महिलाएं  आत्मनिर्भरता की पराकाष्ठा को छूते हुए पुरुषों के धंधे में भी सेंध लगाकर यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि आर्थिक रूप से सशक्त होने की दिशा में महिलाएं भी किसी से कम नहीं.

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