दिल्ली पुलिस के मुताबिक आरोपी बल्क मैसेज भेजकर ग्राहकों को फर्जी योनो ऐप का लिंक भेजते थे. ग्राहक लिंक पर क्लिक कर जैसे ही अपने क्रेडेंशियल इस पर अपलोड करते थे. गिरोह उनके अकाउंट को लॉगिन कर लेते थे और फिर पैसा निकाल लेते थे. केवाईसी अपडेट करने के नाम पर नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल हासिल करते थे.
जांच में पता चला है कि ये लिंक सूरत, कोलकाता, गिरडीह, जामताड़ा, धनबाद और दिल्ली एनसीआर से भेजे जा रहे थे. लिंक भेजने वालों के ठिकानों की पहचान की गई तो यह पता चला कि आरोपी अलग-अलग मॉड्यूल बनाकर काम कर रहे थे. फिशिंग लिंक बनाने और होस्ट करने में एक मॉड्यूल शामिल था, जबकि दूसरा मॉड्यूल थोक एसएमएस और कॉल करने के लिए नकली सिम कार्ड प्राप्त करता था. तीसरा मॉड्यूल फिशिंग लिंक भेजने और पीड़ित को कॉल करने में शामिल था. अगर पीड़ित ने फिशिंग पेज पर ओटीपी नहीं डाला तो यही मॉड्यूल कॉल करता था. इसके अलावा चौथा मॉड्यूल पीड़ितों के नेट बैंकिंग में लॉगिन करता था और धोखाधड़ी से रुपये ट्रांसफर करता था. जबकि पांचवा मॉड्यूल नकली और धोखाधड़ी वाले बैंक खातों की खरीद में शामिल था और छठा मॉड्यूल बैंक खातों से पैसे निकालने का काम करता था. पुलिस ने 25 मार्च को एक साथ आरोपियों को पकड़ने के लिए सूरत, कोलकाता, गिरिडीह, जामताड़ा, धनबाद में उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी.
पुलिस सूत्रों के अनुसार सूरत से 12, कोलकाता से छह, गिरिडीह से दो, जामताड़ा से एक तथा धनबाद से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. आरोपियों के पास से बरामद लैपटॉप, फोन आदि की फोरेंसिक जांच की जा रही है. बरामद सिम कार्डों और मोबाइल की जांच से पता चला कि आरोपियों के खिलाफ 820 शिकायतें दर्ज हैं. आरोपियों में पवन मंडल, टिंकू मंडल, छोटू कुमार मंडल, सन्दीप मंडल, रामजीत मंडल, वीरेंद्र मंडल, रामजीत मंडल, वीरेंद्र मंडल, सुशील कुमार मंडल, रवि कुमार मंडल, संजीत कुमार मंडल, राज किशोर मंडल, विकास कुमार मंडल, महेंद्र मंडल, शंकर कुमार मंडल, पप्पू कुमार मंडल, कुलदीप मंडल, प्रमोद कुमार, विनोद कुमार, नीरज शर्मा, टिंकू कुमार मंडल, तिनकू कुमार मंडल, उमेश कुमार मंडल, राजेन्द्र मंडल और संजय कुमार मंडल शामिल हैं.

