ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां श्रम लागत का एक महत्वपूर्ण तत्व है और वह हमारा प्रतिस्पर्धी अथवा तुलनात्मक लाभ है जिसका हमें फायदा उठाना चाहिए: गोयल
विनिर्माण क्षेत्र में देश को समृद्धि की ओर ले जाने और लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की ताकत है: गोयल
भारत आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के पुनरुद्धार एवं बहाली में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा- पीयूष गोयल
गोयल ने कहा, भारत को वस्तुओं और सेवाओं में से हरेक मोर्चे पर एक लाख करोड़ डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखना चाहिए
गोयल ने लॉजिस्टिक लागत कम करने के लिए उद्योग जगत से गति शक्ति का उपयोग करने का आह्वान किया
पीयूष गोयल ने सीआईआई मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, कपड़ा, उपभोक्ता कार्य और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के पुनरुद्धार और बहाली में महत्वपूर्ण काफी भूमिका निभाएगा. उन्होंने आज सीआईआई मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव 2022 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड के बाद की दुनिया में हम एक नई विश्व व्यवस्था देखने जा रहे हैं.
गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अपने संबोधन में कहा, ‘आज हम यूक्रेन- रूस संकट आदि कारणों से अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देख रहे हैं लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि भारत आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के पुनरुद्धार और बहाली में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. कोविड के बाद की दुनिया में हम एक नई विश्व व्यवस्था और नए भारत को देखने जा रहे हैं. हालांकि आज हम 3 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था हो सकते हैं लेकिन हमें काफी साहसिक और आक्रामक लक्ष्यों की आकांक्षा करनी चाहिए. व्यक्तिगत तौर पर मुझे लगता है कि हम अभी भी 2026 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रख सकते हैं, लेकिन यह तभी संभव होगा जब तक आप सब पूरे उत्साह के साथ इस महत्वाकांक्षी योजना भाग लेंगे.’
गोयल ने उद्योग जगत के दिग्गजों से श्रम प्रधान क्षेत्रों में भारी निवेश करने का आह्वान किया.
उन्होंने कहा, ‘आपके पास लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की ताकत है, आपके पास समाज वंचित तबकों को बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन देने की शक्ति है. कपड़ा, प्लास्टिक, फुटवियर, वाहन कलपुर्जा, खेल के सामान, कृषि/ खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में साथ मिलकर हम लाखों नहीं बल्कि करोड़ों नौकरियां पैदा कर सकते हैं. ये ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां श्रम लागत का एक महत्वपूर्ण तत्व है और वही हमारा प्रतिस्पर्धी या तुलनात्मक लाभ है जिसका हमें फायदा उठाना चाहिए.’
गोयल ने विश्वास जताया कि भारत का निर्यात चालू वित्त वर्ष में 650 अरब डॉलर को पार कर जाएगा.
उन्होंने कहा, ‘इस साल हर महीने, अप्रैल से लेकर अब तक यानी जनवरी तक और संभवत: अगले दो महीनों के दौरान भी हम भारत के निर्यात इतिहास में एक रिकॉर्ड बनाएंगे. जाहिर तौर पर सामूहिक रूप से भी यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी जहां हमारा मर्केंडाइज निर्यात 400 अरब डॉलर को पार कर जाएगा. इसके अलावा सेवाएं भी काफी तेजी से बढ़ रही हैं. मैंने अनुमान लगाया था कि सेवाओं का निर्यात 225 अरब डॉलर को पार कर जाएगा, फिर मैंने उसे संशोधित करते हुए 240 अरब डॉलर कर दिया. अब सेवाओं के निर्यात के लिए 250 अरब डॉलर का अनुमान जाहिर करता हूं. एक साल के भीतर इस लक्ष्य में दो संशोधन हुए हैं और यही सेवाओं की ताकत है.’
गोयल ने कहा, ‘दोनों ओर से वृद्धि को देखते हुए ऐसा लगता है कि सेवाओं में तेजी से वृद्धि होगी और 2030 तक भारत को एक लाख करोड़ डॉलर के मर्केंडाइज निर्यात और लाख करोड़ डॉलर के सेवा निर्यात की उम्मीद करनी चाहिए.’ उन्होंने आगे कहा, ‘सेवाएं विनिर्माण क्षेत्र पर टिकी हुई हैं और इसलिए आपके पास देश को समृद्धि की ओर ले जाने की ताकत है.’
गोयल ने कहा कि भारत को 2026 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि कोविड-19 ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की नाजुकता को उजागर किया है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को केंद्र में लाया है.
गोयल ने कहा, ‘देश में हमारे पास उत्कृष्ट एफडीआई प्रवाह आ रहा है. आज हम दुनिया में मोबाइल हैंडसेट के दूसरे सबसे बड़े निर्माता बन चुके हैं. हम दुनिया के सबसे बड़े वाहन विनिर्माताओं में शामिल हैं. हमें अब इन सफलताओं को अन्य क्षेत्रों में दोहराने की जरूरत है ताकि नए क्षेत्रों में हम वैश्विक चैंपियन बन सकें. उन्होंने कहा, ‘हमारे स्टार्टअप हमें गौरवान्वित कर रहे हैं और वे भारत की प्रौद्योगिकी गाथा को आगे बढ़ा रहे हैं. हमारे पास 2022 में महज 53 दिनों के भीतर 10 यूनिकॉर्न तैयार हुए हैं. वे सिर्फ ‘बादाम’ ही नहीं हैं बल्कि ‘बादम की बर्फी’ हैं.’
गोयल ने कहा कि भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए हमें एज (ईडीजीई) पर ध्यान देने की जरूरत है जहां ई यानी इकनॉमिक्स ऑफ स्केल, डी यानी डेमोग्राफिक डिविडेंड, जी यानी गवरर्नमेंट एवं उद्योग गुण्वत्ता और ई यानी एफिसिएंसी पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ‘ब्रांड इंडिया’ को उभारने के लिए हमें गुणवत्ता के प्रति मानसिकता में बदलाव की जरूरत है.
गोयल ने कहा, ‘हालांकि कोविड-19 दुनिया के बाद हम स्वीकार करते हैं कि हम हर चीज का मास्टर नहीं हो सकते हैं! हमें माइकल पोर्टर के प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के सिद्धांत और डेविड रिकार्डो के तुलनात्मक लाभ के सिद्धांत के अनुसार फोकस वाले क्षेत्रों की पहचान करने की आवश्यकता है.’
मंत्री ने निजी क्षेत्र को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम गति शक्ति एनएमपी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसका उद्देश्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समन्वित योजना और निष्पादन के जरिये लागत को कम करना है.
मंत्री ने कहा, ‘आज हमारे पास डेटा के 360 से अधिक लेयर के साथ एक जीवंत पीएम गति शक्ति है जो एपीआई के जरिये एक-दूसरे से बोलती है और मेरे विचार से यह एक क्रांतिकारी अवधारणा है जिसे आज तक दुनिया में कहीं भी नहीं आजमाया गया है.’
गोयल ने सभी उद्योग संगठनों के लिए तीन सूत्री कार्य योजना दी:
• बड़ी कंपनियों को एमएसएमई को एकीकृत करने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित करें.
• घरेलू विनिर्माण में एक दूसरे का सहयोग करें.
• विनिर्माण में भर्ती के लिए युवा दिमागों को प्रशिक्षित करें.
गोयल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए कहा, ‘भारत को हर तरीके से मजबूत बनने के लिए अपने अतीत के गौरव से सीखने और भविष्य के लिए सही दृष्टिकोण को अपनाने की जरूरत है.’ गोयल ने कहा कि आइए हम सभी भारत को हर मोर्चे पर मजबूत बनाने के लिए साथ आएं और इस दिशा में बड़े एवं साहसिक कदम उठाएं.

