कायनात इस कोशिश में लगी रहती है की दुनिया के लोग भाईचारे से रहे. बार बार इसके संकेत देती रहती है. ऐसा ही एक संकेत इस अप्रैल महीने में भी है. अप्रैल महीने के आठ दिन हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई तीनों धर्मों के लोग एक साथ अपनी-अपनी धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार उपवास रखकर प्रार्थना करेंगे. हिन्दू समाज के लोग व्रत, मुस्लिम समाज के लोग रोजा और ईसाई समाज के लोग लेंट (उपवास) रखेंगे. ईसाई समाज का 40 दिनी उपवास दो मार्च से चल रहा है. वहीं दो मार्च से वासंतिक नवरात्र शुरू होने से सनातनधर्मी नौ दिवसीय उपवास रखेंगे. उधर 3 अप्रैल से रमजान शुरू होने के कारण मुस्लिम रोजा की रवायत निभाएंगे. मतलब 3 अप्रैल से 10 मार्च तक हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई एक साथ ईश्वर की भक्ति के रहेंगे.
चैत्र नवरात्र दो अप्रैल से शुरू हो रहा है. यह दस अप्रैल तक चलेगा. इसमें लोग व्रत रखकर भगवती की आराधना करेंगे. इसके साथ ही कन्याओं का देवी रूप में पूजन करेंगे. पहले दिन कलश की स्थापना होगी है. कई लोग केवल जल या दूध अथवा फलाहार के संकल्प के साथ व्रत रखेंगे, तो कई एकासना करेंगे. घरों व मंदिरों में दुर्गा सप्तशती के पाठ, यज्ञ-हवन आदि अनुष्ठान किए जाएंगे. वहीं कन्या भोज, जगराते और फिर भंडारे भी होंगे.
ईसाई समाज के लोग दो मार्च से लेंट (उपवास या चालिसा काल) का उपवास रख रहे हैं. जो 15 अप्रैल को गुड फ्राइडे के बाद समाप्त हो जाएगा. ईसाई समाज के लोग अपनी इच्छा के अनुसार पसंदीदा खाद्य पदार्थ का त्याग करते हैं. जो पैसा बचता है उसे गरीबों को दान दिया जाता है.
इस्लामी कैंलेंडर के मुताबिक रमजान का पवित्र महीना 3 अप्रैल से शुरू होगा. हालांकि चांद पर निर्भरता के कारण यह एक दिन आगे या पीछे संभव है. इस हिसाब से ईद के चांद तक रोजा का पालन मुस्लिम करेंगे. रमजान में लोग तरावीह की नमाज पढ़ते हैं. दिन-रात अल्लाह की इबादत करते हैं.

