राज्यसभा में केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री डॉ. भारती पवार ने बताया कि कोवाक्सिन पर महज 35 करोड़ रुपये आईसीएमआर ने खर्च किए हैं, जबकि बीते जनवरी माह तक कंपनी की ओर से 171.76 करोड़ रुपये रॉयल्टी के रूप में मिले हैं. वहीं आईसीएमआर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि कोवाक्सिन से मिलने वाली रॉयल्टी का इस्तेमाल विभिन्न शोध-अनुसंधान में किया जा रहा है. दुनिया के 50 से भी अधिक देशों में 2 खुराक वाली इस वैक्सीन को दिया जा रहा है.
कोरोना की देसी वैक्सीन से आईसीएमआर की 136 करोड़ रुपये की अब तक कमाई हुई है. कोवाक्सिन की खोज करने के बाद आईसीएमआर ने भारत बायोटेक के साथ उत्पादन और आपूर्ति को लेकर करार किया था. आईसीएमआर को कुल 5% रॉयल्टी देने का समझौता हुआ था.

