विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO का मानना है कि जिस हवा में हम सांस ले रहे है वो स्वास्थ्य के मानक के अनुसार ठीक नहीं है. जीवाश्म ईंधन के उपयोग ने हवा को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बना दिया है. सांस से संबंधी बीमारियाँ बढ़ी है. हमें इसका उपयोग जितना हो सके कम करना चाहिए. वाहनों से निकलने वाले धुएं यह अस्थमा व फेफड़ों से जुड़ी अन्य बीमारियों के लिए जिम्मेदार है.
डब्ल्यूएचओ ने सोमवार को इस सम्बन्ध में रिपोर्ट जारी किये. डब्ल्यूएचओ के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन व स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख डा. मारिया नेइरा के अनुसार, ‘महामारी को मात देने के बाद वायु प्रदूषण के कारण हर साल करीब 70 लाख लोगों की मौत और अनगिनत लोगों की सेहत का नुकसान अब स्वीकार्य नहीं है. डब्ल्यूएचओ के पूर्वी भूमध्यसागरीय व दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता सबसे खराब है. इसके बाद अफ्रीका का नंबर आता है. डब्ल्यूएचओ ने छः माह पूर्व हवा की गुणवत्ता संबंधी सख्त दिशा-निर्देश दिए थे.

