गुजरात : गुजरात के वडोदरा केंद्रीय जेल के कैदियों ने अपना खुद का रेडियो स्टेशन शुरू किया. इस पहल का उद्देश्य कैदियों का पुनर्वास और उनके रचनात्मक पक्ष को व्यक्त करने में मदद करना है. यह जानकारी अधिकारियों ने दी. अधिकारियों ने कहा कि जेल में लगभग 1,500 कैदी हैं और उनमें से कुछ को इस आंतरिक रेडियो जेल सेवा के हिस्से के रूप में रेडियो जॉकी बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा. इस तरह की रेडियो सेवा शुरू करने वाली यह गुजरात की चौथी जेल है.
वडोदरा केंद्रीय जेल के कैदी कल्याण अधिकारी महेश राठौड़ ने बताया कि प्राधिकारियों ने जेल परिसर के भीतर एक स्टूडियो स्थापित किया है और 60 से अधिक स्पीकर विभिन्न बैरकों में स्थापित किये गए हैं, ताकि कैदी रेडियो सेवा को सुन सकें. उन्होंने कहा, इस सेवा का मुख्य लाभ यह है कि हम कैदियों के बीच विभिन्न मुद्दों के बारे में उन्हें शिक्षित करने के साथ ही उनमें जागरूकता फैला सकें.
गुजरात के कारागार महानिरीक्षक केएलएन राव ने केंद्रीय जेल में रेडियो सेवा का शुभारंभ किया और कहा कि यह जेल कैदियों के लिए बहु-स्तरीय इन्फोटेनमेंट (सूचना और मनोरंजन) मंच के रूप में काम करेगा. अहमदाबाद केंद्रीय जेल में पिछले साल 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर इस तरह की रेडियो सेवा शुरू की गई थी. यह सेवा बाद में राजकोट और लाजपोर जेलों में भी शुरू की गई थी.
सेंट्रल जेल अंबाला ने अपने करीब 1100 बंदियों की संचार की जरूरतों को मद्देनज़र रखते हुए अपना जेल रेडियो शुरू कर दिया है. यह जेल हरियाणा की 3 केंद्रीय जेलों में से एक है, जिसमें वर्ष 1949 में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को फांसी दी गई थी. हरियाणा राज्य के पहले जेल रेडियो का उद्घाटन 16 जनवरी को पानीपत में हरियाणा के जेल मंत्री रंजीत सिंह, एसीएस गृह और जेल राजीव अरोड़ा, हरियाणा जेल महानिदेशक के. सेल्वराज, पानीपत जेल के सुपरिंटेंडेंट देवी दयाल और वर्तिका नन्दा द्वारा किया गया.

