BnnDesk: यह सच है कि सहारा प्रमुख को 28 फरवरी 2014 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. इसको लेकर भी मीडिया में कई तरह की बातें आज भी होती है, कुछ का कहना है कि पैसे नहीं जमा करने के कारण जेल हुआ तो कुछ का कहना है कि फ्रॉड करने के कारण जेल जाना पड़ा इत्यादि..लेकिन यहां जेल जाने का कारण क्या था आइए जानते हैं.
जब दिसंबर 2012 में सहारा समूह के आग्रह पर सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को लगभग 25000 की राशि को तीन किस्तों में जमा करवाने के लिए कहा जिसमे से 5,120 करोड़ रुपए की राशि तुरंत जमा करानी थी. पहली किस्त सहारा ने जमा कर दिया. उसके बाद फ़रवरी 2013 में जब सहारा दो बची हुई किस्तें जमा कराने में असफल रहा तब सेबी ने सहारा समूह के बैंक खाते फ्रीज़ करने और जायदाद को ज़ब्त करने के आदेश जारी किए.
इसके बाद अप्रैल 2013 को सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को सेबी ने तलब किया और वे उसके समक्ष हाज़िर हुए. फिर जुलाई 2013 को सेबी ने सहारा ग्रुप के ख़िलाफ़ आदेश पालन न करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
इसके बाद 20 फ़रवरी, 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत रॉय को पेश होने का आदेश दिया.
26 फ़रवरी 2014 तक भी सुब्रत रॉय अदालत में हाज़िर नहीं हुए तब सुप्रीम कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ गैर-ज़मानती वारंट जारी किया. सहारा प्रमुख ने अपनी माँ की बीमारी को मौजूद न होने की वजह बताया. हालांकि इस जबाब से अदालत संतुष्ट नहीं हुआ. जिसके बाद 28 फ़रवरी 2014 को सुब्रत रॉय को लखनऊ में गिरफ़्तार करके सुप्रीम कोर्ट के अवमानना के केस में 4 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेजा गया.
इसके बाद मार्च 2014 को हुई सुनवाई में सुरेमे कोर्ट ने सुब्रत रॉय को ज़मानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया.
6 मई 2016 को सुब्रतो राय जेल से 4 हफ्तों के लिए पैरोल पर मां के अंतिम संस्कार के लिए रिहा किया गया. उसके बाद से वे जेल के बाहर ही हैं. सहारा प्रमुख ने 2 वर्ष 2 महीने और 2 दिन का समय जेल में बिताया. उन्होंने जेल में बिताए गए समय में एक किताब भी लिखी जिसका नाम है “थॉट फ्रॉम तिहार”. इस किताब में उन्होंने जेल में बिताए समय और अपने जीवन के कई पहलुओं को लिखा है.
इसे भी पढ़ें:-
इसे भी पढ़ें:-