इसे तंत्र की विफलता ही कहेंगे कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एथलीट की दुनिया में अपना सिक्का जमाने वाली आज फांकाकशी की जिन्दगी जीने को मजबूर है. खेल के लिए जीवन को समर्पित करने वाली झारखण्ड में जेवलिन थ्रो की सरकारी ट्रेनिंग सेंटर की कोच और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी मारिया गोरोती खलखो की हालत इन दिनों बेहद ख़राब है. 63 वर्षीय मारिया को फेफड़ो की बीमारी है. उनकी आर्थिक स्थिति भी थी नहीं है. खेल के प्रति उनके जूनून को बस इसी में आँका जा सकता है कि उन्होंने खेल को कारण से शादी भी नही की. अपना परिवार नहीं बसाई .बेबसी की इस हालत में वे अपनी बहन की यहाँ बिस्तर पर पड़ी रहती है. पैसे के अभाव में न तो सही इलाज हो पा रहा है और न सही खुराक मिल पा रही है. रांची जिला कबड्डी संघ के पदाधिकारियों ने मारिया से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना. संघ ने सरकार से उनकी मदद करने की गुहार लगाई है. झारखंड सरकार के खेल निदेशालय ने मारिया की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद तत्काल सहायता के रूप में 25 हजार रुपये का चेक उपलब्ध कराया है. उन्हें आज जरूरत है इमानदार मदद की, एक उचित सम्मान की.
मरिया खालको से जेवलिन थ्रो के गुर सिख कर कइयो ने नाम भी कमाया और पैसा भी, पर जिससे सिखा उस पर ध्यान नहीं दिया. दो साल पहले मारिया की तबियत ज्यादा बिगाड़ गयी थी. फेफड़े की बीमारी के चपेट में आ गयी थी. मीडिया में खबरें छपीं तो राज्य सरकार के खेल विभाग ने खिलाड़ी कल्याण कोष से एक लाख रुपये की मदद दी थी, लेकिन महंगी दवाइयों और इलाज के दौर में यह राशि जल्द ही खत्म हो गई.
मारिया खालको की खेल उपलब्धियों पर एक नजर-
1974 – नेशनल लेवल के जेवलिन मीट में गोल्ड मेडल , तब आठवीं की छात्रा थी.
ऑल इंडिया रूरल समिट में भी जेवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल.
1975 में मणिपुर में आयोजित नेशनल स्कूल कंपीटिशन में गोल्ड मेडल
1975 -76 में जालंधर में अंतर्राष्ट्रीय जेवलिन मीट में गोल्ड मेडल
1976-77 में भी नेशनल-रिजनल प्रतियोगिताओं में सफल
1988 से 2018 तक – झारखंड के लातेहार जिले के महुआडांड़ स्थित सरकारी ट्रेनिंग सेंटर में कोच, वेतन मात्र आठ-दस हजार

