केंद्रीय गृह मंत्रालय झारखण्ड राज्य में हाल के दिनों में घटित घटनाओं के कारान उत्पन्न विधि व्यवस्था को लेकर राज्यपाल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. जिस पर राज्यपाल ने भाषा विवाद, मॉब लिंचिंग , नक्सल गतिविधियों को लेकर चिंता जताई और विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मुद्दों को लेकर आने वाले घटना बजट सत्र और पंचायत चुनाव में राज्य की विधि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. इसके साथ ही डायन बिसाही को अभिशाप बताया. कहा कि झारखंड राज्य में डायन हत्या एक विकराल सामाजिक बुराई है. कई क्षेत्रो में कुछ अप्रिय होने पर इसे डायन का प्रकोप मान कर किसी उम्रदराज महिला को डायन की संज्ञा देकर सामाजिक बहिष्कार करते हैं एवं हत्या भी कर दी जाती है. लचर स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा तथा अंध विश्वास इसके मुख्य कारण हैं. बता दे कि सांसद संजय सेठ ने झारखण्ड में हुए मोब लिंचिंग की तीन घटनाओं को संसद में उठाया था.
बता दे कि झारखण्ड में भाजपा के पूर्व सांसद रविन्द्र राय के वाहन पर हमला हुआ था. इसी के साथ भाषा विवाद को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में आंदोलन हुए, मोब लिंचिंग की घटनाये हुई. प्रशांत बोस की गिरफ्तार के विरोध में नकस्ली हिंसा और घटनाये राज्य में बढ़ गई थी. जिस पर गृह मंत्रालय ने राज्यपाल से झारखंड में विभिन्न संगठनों द्वारा पेसा कानून लागू करने की मांग तथा अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत चुनाव कराये जाने का विरोध, नियोजन नीति एवं 1932 के कट ऑफ वर्ष के आधार पर स्थानीय नीति पर चल रहे जिच को लेकर भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी.

