बिमारियों को ठीक करने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल और नित हए प्रयोग हो रहे है, इसी कड़ी में टीबी के मरीजों के लिए भी एक विशेष तकनीक टीबी कफ कलेक्शन एप्प का इस्तेमाल हो रहा है. जिसमे खांसी की आवाज से टीबी की पहचान होगी. इसको लेकर ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिए जा रहे है. मथुरा के जिला समन्वयक आलोक तिवारी ने बताया कि कफ साउंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सोल्यूशन टू डिट्रेक्ट टीबी को लेकर ऑनलाइन प्रशिक्षण के बाद टीमों ने सर्वे पूर्ण कर लिया है. शासन से जारी आदेशों के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई गई. टीमों के कार्यों को भी चेक किया गया. इनके नाम-पते गोपनीय रहेंगे.
अधिकारी ने बताया कि टीबी कफ कलेक्शन एप में 124 लोगों की अलग-अलग तरीकों की आवाज को रिकॉर्ड किया गया है. शासन की ओर से जारी आदेश के बाद सर्वे पूरा कर रिपोर्ट भेज दी गई है. इस सर्वे में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में टीबी रोगी एवं उनके परिजन चिन्हित किए गए. इसमें 44 मरीज टीबी के और 80 उनके परिजन शामिल हैं.
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संजीव यादव ने बताया कि चिन्हित किए गए लोगों में बलदेव में तीन, बरसाना और छाता से भी तीन-तीन, फरह और गोवर्धन में पांच-पांच, मांट में तीन, वृंदावन में 56, शहरी क्षेत्र में 26, कोसीकलां में छह, चौमुहां तीन एवं नौहझील में तीन लोगों की अलग-अलग तरह की आवाज स्मार्ट मोबाइल फोन में रिकॉर्ड की गई.
सर्वे टीम के सदस्य वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक अखिलेश दीक्षित, बिहारी लाल, निश्चल, साजिद बेग, अर्जुन दिवाकर, बांके बिहारी, राहुल लवानिया, अमित चौहान, किशन चंद्र घर-घर गए और आवाज रिकॉर्ड की.

