राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत NBT नई दिल्ली तथा डा. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, रांची TRI के संयुक्त तत्वावधान में 8-10 मार्च तक चलने वाली तीन दिवसीय अनुवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया. रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व भाषा मर्मज्ञ सत्यनारायण मुंडा मुख्य अतिथि के रूप में थे. टीआरआई के निदेशक डा. रणेंद्र कुमार ने अतिथियों का परिचय कराया. सहायक निदेशक राकेश रंजन उरांव ने आभार व्यक्त किया और संचालन विक्रम जोरा ने किया. कार्यशाला का शुभारंभ पारंपरिक रूप से नगाड़ा बजाकर किया गया. कार्यशाला में झारखंड की तीन विलुप्त हो रही जनजातीय भाषाओं- सबर, परहिया और कोरवा में बच्चों की 15 पुस्तकों के अनुवाद का कार्य किया जाएगा. सत्यनारायण मुंडा ने कहा कि अनुवाद के दौरान हमें अपनी मूलभाषा के शब्दों को याद रखना आवश्यक है. भाषा की अपनी संस्कृति होती है और अनुवाद में इस पर गंभीरता से ध्यान देना होता है. टीआरआई के निदेशक डा. रणेंद्र कुमार ने कहा कि भाषाओं के मरने का अर्थ है- एक संस्कृति का मरना. कार्यशाला में कई जिलों से प्रतिनिधि आये थे.

