झारखंड के देवघर में त्रिकुट पहाड़ के रोप-वे पर हादसे में सेना , वायुसेना व NDRF की टीम रेस्क्यू में लगी हुई है. रोप-वे के चलने के लिए वहां तारों का जाल है. इस वजह से सेना के हेलीकॉप्टर को ऑपरेशन को अंजाम देने में दिक्कतें हो रही हैं. 26 घंटे बाद भी 14 जिंदगियां फंसी हुई हैं. इन्हें निकालने के लिए सेना, वायुसेना और NDRF ने मोर्चा संभाल हुआ है. सोमवार दोपहर 12 बजे MI-17 हेलिकॉप्टर की मदद से दोबारा रेस्क्यू शुरू किया गया. सोमवार को रेस्क्यू के वक्त शाम साढ़े पांच बजे एक 48 वर्षीय पर्यटक का हेलिकॉप्टर में चढ़ने के दौरान सेफ्टी बेल्ट टूट गया. इससे वह करीब डेढ़ हजार फीट गहरी खाई में गिर गया. उसे अस्पताल में पहुंचा दिया गया है. जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है. रेस्क्यू में अब तक 33 श्रद्धालुओं को बचाया जा चुका है. जबकि दो लोगों की मौत हो चुकी.
रोप-वे के चलने के लिए वहां तारों का जाल है. इस वजह से सेना के हेलीकॉप्टर को ऑपरेशन को अंजाम देने में दिक्कतें हो रही हैं. तारों के जाल की वजह से सोमवार को सुबह 6 घंटे के प्रयास के बाद हेलिकॉप्टर लौट गया था. दोबारा प्लान करके रेस्क्यू शुरू किया गया है, जिसका फायदा दिख रहा है. ऑपरेशन में एयरफोर्स के तीन हेलिकॉप्टर लगे हैं. स्थिति यह है कि रविवार की शाम करीब 4 बजे हुए हादसे के बाद 18 ट्रॉलियों में 48 श्रद्धालु फंसकर हवा में लटक गए थे. हादसे में 12 लोग घायल हो गए थे. एनडीआरएफ की टीम और सेना के कमांडो मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं.

