पश्चिम चंपारण जिले के गौनाहा का जांबाज दिवाकर महतो देश की रक्षा में बलिदान हो गये. रविवार को राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव महुई में किया गया. इस अवसर पर सेना के जवानों ने अपने बहादुर साथी को अंतिम सलामी दी. सेना के अधिकारियों ने श्मशान घाट पर पिता शंकर महतो को तिरंगा सौंपा. जवान बेटे के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजिल करते हुए दिवाकर के पिता ने शंकर ने कहा कि मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ है. उसके नहीं रहने का गम तो जीवन भर सालता रहेगा, लेकिन जाते-जाते उसने मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया. उसने मेरा ही नहीं पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है. हजारों की संख्या में लोग शहीद दिवाकर के घर पर पहुंचे. लोगों ने शहीद दिवाकर जिंदाबाद, शहीद दिवाकर अमर रहे के नारे लगाये.
करीब दो साल पहले दिवाकर की शादी महुई गांव में ही फूलकुमारी से हुई थी. उसकी गोद में ढाई माह का एक लड़का है. दिवाकर का सबसे बड़ा भाई ज्ञानचंद महतो भी सेना में है.

