नियोजन नीति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बजट सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को विपक्ष पर हमलावर दिखे. विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के कनपट्टी पर रिवाल्वर सटा के कोई काम नहीं करवा सकता. जो होगा प्यार से होगा. राज्य में जनभावना के अनुरूप नियोजन नीति बनाई जाएगी. वह खतियान का सम्मान करते हैं. 1911, 1932 और 2005 में भी सर्वे हुआ. हर बार गजट का प्रकाशन भी हुआ. अब सदन तय करे कौन सा सर्वे पकड़ें. मुख्यमंत्री ने कहा कि आग लगाना आसान है, बुझाना कठिन. राज्य में समन्वय बनाने व वैधानिक पहलुओं का अध्ययन कर सरकार नियोजन नीति पर आगे बढ़ेगी. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कई बड़ी घोषणाएं भी कीं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें राज्य के लिए नहीं बल्कि अपने विधायकों के लिए काम कर रही थी. 1.36 लाख करोड़ का भुगतान मांग केंद्र के समक्ष रखा है. उसे लेकर रहेंगे. अधिकार छीन कर लेंगे. कोयला और खनिज संपदाओं की ढुलाई बंद करेंगे.
सीएम ने कहा कि राज्य बने हुए 21 साल हो गए. लक्ष्यों को पाने के लिए सही रास्तों का भी चुनाव करना है. राज्य के आदिवासियों, मूलवासियों को हमसे उम्मीदें हैं. कभी भी इन्हें परिवार से अलग नहीं समझा. राज्य की समस्याओं, अनसुलझे सवालों का हल ढूंढने के लिए प्रयास कर रहे हैं. सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकार की नजर जा रही, सरकार उसके दरवाजे तक जा रही. हमारी सरकार गरीबों को एक हजार पेंशन और एक रुपया प्रति किलो अनाज दे रही. 35 लाख लोगों को किसान क्रेडिट कार्ड देने का लक्ष्य रखा है जिसमे सात लाख को किसान क्रेडिट दिया गया है. समय सीमा हटाकर 18साल की उमर से विधवा पेंशन शुरू किया, 10 नए आवासीय विद्यालय नेतरहाट के तर्ज पर खोले जा रहे हैं . किसान ऋण माफी का काम हो रहा है, गरीबों को तीन कमरों का आवास देने की योजना है.

