चतरा : एक वक्त था जब सूबे के नक्सल प्रभावित चतरा जिले की फिजाओं में अफीम की गंध फैली हुई थी। नक्सलियों के डर से ग्रामीण अफीम की खेती में उनका भरपूर साथ देते थे। लेकिन आज समय बदला है, खौफ कम हुआ है और इन वादियों में अफीम की जगह अब गेंदा फूल की महक सभी को मंत्रमुग्ध कर रहा है।
अति उग्रवाद प्रभावित चतरा जिले के सिमरिया अनुमंडल स्थित शीला गांव में गेंदा फूल की खेती में जुटी इन महिलाओं की जिन्दगी अब बड़ा बदलाव आया है।
कभी अफीम की खेती में लगी महिलाओं को आज गेंदा फूल के बलबूते इनकी आमदनी तो हो ही रही है और अब उनकी “आत्मनिर्भरता“ गांव की दूसरी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आ रही है।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत सखी मंडल की महिलाएं गेंदा फूल की खेती में किस्मत आजमा रही है। इनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज शीला गांव गेंदा फूल के उत्पादक के साथ-साथ निर्यातक भी बन चुका है।
जेएसएलपीएस की ओर से इन सखी मंडल की सदस्यों को बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है और जिले के कई अन्य हिस्सों में भी गेंदा फूल की खेती की शुरुआत की गयी है।
खुशी की बात यह है कि इस गांव की महिलाएं फूल की खेती कर पुरुषों से आगे निकल गई है। इस गांव की महिलाओं में फूलों की खेती को लेकर काफी जुनून है, जुनून कुछ करने का, जुनून अपनी किस्मत बदलने का।

