झारखंड बिजली वितरण निगम JBVNL राज्य में जितने की बिजली वितरित करता है उसे उतनी राशी नहीं मिल पाती. लाइन लोस के अलावा बिजली चोरी का खामियाजा विभाग को भुगतना पड़ता है. एक अनुमान के अनुसार राज्य में करीब 2.5 लाख उपभोक्ता बिना मीटर के बिजली उपयोग कर रहे है. हालांकि बिना मीटर वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं से करीब 250 रुपये प्रतिमाह निश्चित शुल्क वसूला जाता है. शहरों में कनेक्शन लोड के आधार पर निश्चित शुल्क तय की गई है. लेकिन, इससे बिजली के वास्तविक उपयोग का शुल्क नहीं वसूला जाता है.इस क्षति को कम करने के लिए जेबीवीएनएल ने अगले छह से आठ महीने में ऐसे सभी उपभोक्ताओं के घर अनिवार्य रूप से मीटर लगाने का लक्ष्य तय किया है. ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव सह झारखंड ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी अविनाश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी सूरत में बिना मीटर के बिजली का उपयोग नहीं होना चाहिये. मीटर लगाना राजस्व वसूली की दृष्टि से भी जरूरी है.
दूसरी तरफ करीब 1.5 लाख उपभोक्ताओं के मीटर या तो जल गये हैं या खराब हो गये हैं. इनके मीटर भी अगले आठ महीने के अंदर बदल कर नये लगाए जाएंगे. इस प्रकार चार लाख उपभोक्ताओं के घर नये मीटर लगाये जाएंगे. प्रदेश में बिजली के कुल उपभोक्ताओं की संख्या 45.35 लाख हैं. इनमें घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या 42.28 लाख है. शहरी उपभोक्ताओं की संख्या 9.93 लाख और ग्रामीण उपभोक्ताओं की संख्या 32.35 लाख है.
बीपीएल उपभोक्ता 13.51 लाख हैं और बिजली किसान उपभोक्ता 60 हजार से अधिक हैं. इनमें बिना मीटर वाले उपभोक्ताओं की संख्या करीब 2.5 लाख आंकी गई है. बिना मीटर वाले उपभोक्ता राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हैं. शहरी क्षेत्रों में इनकी संख्या काफी कम बताई गई है.

