बिहार के बक्सर जिले के कुकुढ़ा गांव के रहने वाले नंदलाल सिंह यादव के पुत्र जयप्रकाश करीब तीन साल पहले आस्ट्रेलिया पढ़ाई करने गए और इसी दौरान उन्हें मेलबर्न शहर के जीलॉन्ग की रहने वाली विक्टोरिया से दोस्ती हो गई. दोस्ती प्यार में बदल गई. इसी दौरान जयप्रकाश को एक कंपनी में एमएस सिविल इंजीनियर के पद पर नौकरी भी मिल गई. इसके बाद प्रेमी युगल ने साथ में जीवन बिताने का निर्णय ले लिया. प्रेमी युगल के लिए परिवारों से इस मामले में बात करने की समस्या थी. दोनों ने अपने अपने परिजनों से बात की और दोनो के परिजनों ने शादी के लिए हामी भर दी.
इस बीच, हालांकि जयप्रकाश के पिता जी ने एक शर्त रख दी कि शादी बिहार में ही होगी. विक्टोरिया के परिजनों को भी यह शर्त मानने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई. इसके बाद शादी की तिथि निश्चित की गई.विक्टोरिया अपने पिता स्टीवन टॉकेट एवं माता अमेंडा टॉकेट 19 अप्रैल को कुकुढा गांव पहुंचे और हिंदू रीति रिवाज से 20 अप्रैल की रात अपनी बेटी विक्टोरिया और जयप्रकाश सात जन्मों के बंधन में बंध गए. विक्टोरिया भी जयप्रकाश से शादी रचा अपने आप को काफी खुशनसीब समझ रही हैं. इस शादी से दोनों ही परिवार के लोग काफी खुश हैं. विक्टोरिया के पिता स्टीवन टॉकेट को भी बिहारी संस्कृति काफी पसंद आई. उन्होंने कहा कि यहां कि रश्मो रिवाज और संस्कृति को देख काफी खुशी हुई. विक्टोरिया के पिता ने अपनी बेटी का कन्यादान किया. स्टीवन कहते हैं कि उनकी बेटी अपने ससुराल में खुश रहेगी.
इधर दूल्हे के पिता और पूर्व मुखिया नंदलाल सिंह ने बताया कि मेरे परिवार के लोग जब बेटे की पसंद जानें तो हम लोग ना नहीं कर पाए. हमने कहा कि शादी गांव पर ही हिंदू रीति रिवाज के साथ होगी तो वह लोग भी मान गए. अब शादी करके जहां वह लोग काफी खुश दिख रहे हैं, वहीं दोनो परिवार भी इनकी शादी से काफी खुश हैं. आसपास के लोग भी विदेशी बहू को पाकर खुश हैं. वे भी नवदंपति को शुभकामना देने पहुंच रहे हैं. बहरहाल, यह विवाह इस क्षेत्र के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है.

