नई दिल्ली : भारतीय वैज्ञानिकों ने एक स्वदेशी डिजाइन का कम लागत वाला प्रकाशीय स्पैक्ट्रोग्राफ विकसित किया है. इस स्पैक्ट्रोस्कोप का खासियत यह है कि यह सुदूर क्वासेर और ब्रह्माण्ड की युवा गैलेक्सी के आने वाले धुंधले प्रकाश के स्रोतों, सुपरमासिव ब्लैकहोल और कॉस्मिक विस्फोटों के पास के इलाकों की पहचान भी कर सकता है.
अभी तक इस तरह के स्पैक्ट्रोस्कोप ऊंचे दामों पर आयातित किए जाते थे. भारतीय स्पैक्ट्रोस्कोप को एरीज-देवस्थाल फेंट ऑब्जेक्ट स्पैक्ट्रोग्राफ एंड कैमरा नाम दिया गया है. एडफोस्क का की कीमत 4 करोड़ रुपये रखी गई है. जो कि आयातित उपकरणों का 40 प्रतिशत दाम है.
एडफोस्क को आर्यभट्ट रिसर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ ऑबजरवेशनल साइंसेस नैनीताल ने डिजाइन और विकसित किया है. यह देश में उपलब्ध खगोलीय स्पैक्ट्रोग्राफ में से अपनी तरह का सबसे उपकरण है. इसे नैनीताल के पास 3.6 मीटर देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप पर स्थापित किया गया है.
DOT के लिए आधार बनकर एडफोस्क बहुत ही धुंधले खगोलीय स्रोतों का अवलोकन एक फोटोन प्रति सेकेंड की कम दर वाले स्रोतों का भी पता लगा सकता है. यह बहुत सारे लेंस की जटिल व्यवस्था का उपयोग करता है जो बहुत ही पॉलिश किए हुए खास लेंस होते हैं जिससे आसमान की साफ तस्वीर बन पाती है.
सूदूर खगोलीय स्रोतों से आने वाले फोटोन टेलीस्कोप में आते हैं और स्पैक्ट्रोग्राफ उनमें से अलग-अलग रंगों को छांटने का काम करता है जो अंततः एक इलेक्ट्रॉनिक रूप से रिकॉर्ड किए जा सकने वाले संकेतों में बदले जाते है. इसके लिए स्वदेश में विकसित किया गया चार्ज कपल्ड डिवाइस कैमरे का उपयोग किया जाता है. यह कैमरा -120 डिग्री सेंटीग्रेड तक के अत्यंत कम तापमान में रखा जाता है.

