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मना करने के बाद भी प्रशासन ने काट दिए पेड़ तो सडको पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से लिखित लेने के बाद लौटे वापस

by bnnbharat.com
February 3, 2022
in समाचार
मना करने के बाद भी प्रशासन ने काट दिए पेड़ तो सडको पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से लिखित लेने के बाद लौटे वापस
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झारखण्ड/खूंटी :  ग्रामीणों के  मना करने के बाद भी प्रशासन द्वारा पेड़ काटा जाना एक बड़े विवाद का कारण बन गया. विवाद इतना बढ़ा की  गांव को छावनी में तब्दील करना पड़ा.  मामला खूंटी जिले के टोड़ांगकेल गांव  का है, जहां 6 आम के पेड़ गांववालों के मना करने के बावजूद प्रशासन ने काट दिए ग्रामीण गुस्सा कर सड़कों पर उतर आए। विरोध बढ़ता देख प्रशासन को गांव को छावनी में तब्दील करना पड़ा। इतना ही नहीं, प्रशासन से लिखित में लेने के बाद ही ग्रामीण सड़कों से हटे।

जानकारी के मुताबिक,  टोड़ांगकेल गांव में 6 विशाल आम के पेड़ प्रशासन ने काट दिए थे। इस बात से ग्रामीण बेहद नाराज थे। इसके विरोध में 1 फरवरी को ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। हालांकि,  इसके पहले ग्रामीणों ने बाकायदा प्रशासन को चेतावनी दी थी। लेकिन उनकी अर्जी पर कोई सुनवाई ना होने पर वे भड़क गए।

पुलिस और प्रशासन का विरोध करने के लिए बड़ी तादाद में लोग इकट्ठा हुए थे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। ग्रामीणों ने बकायदा रैली निकालकर प्रशासन के पेड़ काटने का विरोध किया। इसके अलावा, विरोध कर रहे लोगों के हाथों में जीवन बचाओ, वृक्ष काटना बंद करो, पर्यावरण को बचाना है, जैसे नारों के पोस्टर थे। ग्रामीणों का कहना था कि सिर कटेगा, लेकिन पेड़ नहीं कटने देंगे।

 

रैली में शामिल ग्रामीणों को शांत करने के लिए एसडीओ सैयद रियाज अहमद, डीएसपी अमित कुमार, एलआरडीसी जितेन्द्र मुण्डा कार्यपालक पदाधिकारी और सीओ सभी को गांव आना पड़ा। हालांकि बात ना बनने पर, एसडीओ ने बताया कि फिलहाल निर्माण कार्य और वृक्ष कटाई पर प्रशासन ने रोक लगा रखी है ताकि जिले में लॉ एंड आर्डर की स्थिति शांतिपूर्ण और सामान्य बनी रहे।

पर्यवारण को लेकर ग्रामीणों में इस तरह की जागरूकता से प्रशासन भी सकते में है। बता दें कि खूंटी का 90 प्रतिशत से ज्यादा इलाका ग्रामीण है। । पर्यावरण से ही इनके रोजमर्रा के कामकाजों का निवारण होता है। इतना ही नहीं बल्कि, वे पर्यावरण को ही अपना जीवनदाता मान कर इसकी पूजा करते हैं और इसलिए पेड़ों की महत्वता का सम्मान करते हैं।

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