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मौत की सजा पाए कैदियों को खुद खोदनी होती है अपनी कब्र

by bnnbharat.com
March 6, 2021
in समाचार
मौत की सजा पाए कैदियों को खुद खोदनी होती है अपनी कब्र
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बीएनएन डेस्कः उत्तर कोरिया की जेलें और ज्यादा खौफनाक हैं, जहां मानवाधिकारों का कोई ध्यान नहीं रखा जाता. नॉर्थ कोरिया की बहुत कम ही बातें सामने पाती है. दबे-छिपे जो तथ्य सामने आते भी हैं, वे किम जोंग उन की सनक से जुड़े होते हैं. इसी कड़ी में एक और तथ्य निकलकर आया है कि दुनिया के इस हिस्से की जेलें सबसे क्रूर जेलों में से है. नॉर्थ कोरिया की सबसे खतरनाक जेलों में से एक योडोक कंसंट्रेशन कैंप में 10 साल बिताने के बाद किसी तरह चंगुल से छूटे एक शख्स Kang Cheol-hwan ने उस देश की जेलों में रहने वालों के खराब हालात के बारे में बताया.

पूर्व कैदी Kang Cheol-hwan ने द इंडिपेंडेंट को बताया कि उनके दादा साल 1948 से लेकर 1994 के बीच कोरिया की सरकार में थे. किम जोंग इल (किम जोंग उन के पिता) के हाथ में सत्ता आते ही उनके परिवार पर पश्चिमी संस्कृति के असर का आरोप लगने लगा. थोड़े वक्त बाद ये माना गया कि परिवार तत्कालीन शासक और कम्युनिस्ट सोच के खिलाफ जा रहा है. सजा के तौर पर उन्हें जेल में डाल दिया गया. तब कैंग की उम्र काफी कम थी लेकिन तब भी उनसे दिन के 18-18 घंटे कड़ी मजदूरी करवाई गई, जिसमें जंगलों से लकड़ियों के भारी गट्ठे लाना भी शामिल था.

हालात समझने के लिए पिछले ही साल मानवाधिकारों पर काम करने वाली संस्था Amnesty International ने यहां के लैबर कैंपों की सैटेलाइट इमेज ली थी. इसके साथ जुड़ी रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे उन जेलों में बलात्कार, गर्भपात, हत्या और कड़ी मजदूरी जैसी बातें आम हैं. माना जा रहा है कि कोरिया की इन जेलों में 2 लाख से भी ज्यादा कैदी बहुत खराब हालातों में रह रहे हैं. द मिरर की एक रिपोर्ट के अनुसार इन जेलों के चारों ओर राइफल, हैंड ग्रेनेड और खूंखार कुत्तों को लिए एक फौज होती है, जो बाहर निकलने की कोशिश की करने वालों को तुरंत खौफनाक मौत मार देती है.

इनमें से कई जेलों में सिर्फ विदेशी नागरिकों को रखा जाता है. ऐसे ही एक जेल को Hoeryong concentration कैंप या कैंप 22 कहा जाता था, जिसे विदेशी मीडिया की भयंकर आलोचना के बाद बंद कर दिया गया. यहां पर मानवाधिकारों का बुरी तरह से हनन होता था. कैदियों को नारकीय हालातों में रखा जाता. उन्हें एक जोड़ी कपड़े मिलते, वही पहनकर उन्हें पूरी जिंदगी या सजा काटनी होती. बीमार पड़ने पर कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं मिलता, बल्कि कब्र में जिंदा दफना दिया गया।

जेलों का बाहरी दुनिया के साथ कोई संपर्क नहीं रहता. जेल की एक पूर्व गार्ड लिम-हे-जिन के अनुसार यहां रहने वाले कैदी चलती-फिरती लाश से ज्यादा नहीं होते थे. उन्हें पीटा जाता और जेल से भागने की कोशिश पर या तो जिंदा जला दिया जाता या फिर गोलियों से भून दिया जाता था.

विदेशियों के हालात और भी खराब थे. उन्हें खाने के नाम पर 180 ग्राम कॉर्न दिया जाता. अगर कोई कैदी भूख लगने की बात कहे तो उसे जिंदा चूहा या सांप खाने को कहा जाता. हर महीने सैकड़ों कैदी मरते और कितने ही अचानक गायब हो जाते, जबकि उस जेल से बाहर निकल सकने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता था.

एक कमरे में 100 के लगभग कैदियों को रखा जाता. अगर कोई कैदी बहुत ज्यादा मेहनत करे तो उसे इनाम के बतौर अपने परिवार के साथ एक कमरे में रहने की इजाजत मिलती, जहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं होती. Amnesty International की एक डाक्युमेंट्री में किसी तरह से कैद से निकल चुके विदेशी कैदियों ने कोरिया की जेलों के हालात बयां किए हैं.

मानवाधिकारों पर काम करने वाली संस्था Amnesty International ने यहां के लैबर कैंपों की सैटेलाइट इमेज ली

साल 2012 में अमेरिकन मूल के एक शख्स Kenneth Bae को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि उनके पास कैलोथिक धार्मिक सामग्री मिली थी. इसके लिए उन्हें 15 साल की सजा मिली. कई कैदियों को कुछ महीने बाद रिहा कर दिया गया लेकिन वे ज्यादा दिनों तक जी नहीं सके. सबके शरीर का कोई न कोई अंग गायब मिला. कई लोग कोमा में चले गए. कुछ ही लोग दिल-दिमाग से साबुत लौटे, जिन्होंने नॉर्थ कोरिया के इन हालातों के बारे में दुनिया को बताया.

द मिरर की रिपोर्ट के अनुसार जेल में रहने वाली महिला कैदियों के हालात सबसे खराब हैं. जेल में आने से पहले इनका प्रेगनेंसी टेस्ट होता है, इसी दौरान संक्रमित इंजेक्शन लगने से बहुतेरी महिलाओं को यौन रोग हो जाते हैं. वहीं कैंप के रहने के दौरान महिलाओं के साथ बलात्कार और फिर जबर्दस्ती अबॉर्शन आम है. अगर कोई महिला अबॉर्शन के लिए राजी न हो तो उसे पहाड़ों पर बेहद वजनी सामान उठाकर लाने- ले जाने को कहा जाता है, ताकि उसका गर्भपात हो जाए.
यहां तक कि इन जेलों में अगर किसी कैदी को किसी गलती के लिए मौत की सजा मुकर्रर हो जाए तो उसे अपनी क्रब खुद खोदनी होती और उसमें खुद ही लेटना होता था. जेल में रह चुकी Lee Soon-ok नामक महिला कैदी ने अपनी किताब Eyes of the Tailless Animals: Prison Memoirs of a North Korean Woman में इन सारी बातों का जिक्र किया है. वे बताती हैं कि कैसे उन्हें लंबे वक्त तक एक छोटे से कमरे में रहना पड़ा. इससे उनकी रीढ़ की हड्डी सिकुड़ने लगी, कद कम हो गया, पीठ हमेशा के लिए कुबड़ी हो गई.

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