मुरादाबाद: यूक्रेन की सेना का रवैया छात्रों के लिए ठीक नहीं है. सायरन की आवाज़ बहुत ही ज्यादा डराने वाली होती थी. युक्रेन में हम काफी डरे सहमे थे. वहां बचना मुश्किल था. हंगरी आने के बाद कुछ राहत मिली. भारतीय दूतावास के कर्मचारियों ने भी हमारी मदद की. यह कहना है मुहम्मद वसीम का. वासिम यूक्रेन की उज्जाहरोड नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की दूसरे वर्ष की पढ़ाई कर रहा है. दर्द और डर के साए में पांच बिताते हुए वसिम बुधवार को शाम भारत में अपने घर मुरादाबाद भगतपुर टांडा ब्लाक के मानपुर गांव अपने घर पहुंचा. वसीम के पिता जुल्फेकार हुसैन बरखेड़ा ग्राम प्रधान हैं. छात्र ने सरकार की सराहना की.
वासिम ने बताया कि भारतीय दूतावास से जारी सलाह के बाद वह अपने दोस्तों सम्भल निवासी मुहम्मद अनस और अमरोहा के मुहम्मद हैदर के साथ बस से हंगरी बार्डर तक सफर तय किया. 27 किलोमीटर का सफर छह घंटे में पूरा हुआ. बस के सफर का किराया उन्हीं को देना पड़ा. हंगरी हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद सरकार ने सारी जिम्मेदारी निभाई. उन्हें दिल्ली हवाई अड्डे के बाद यूपी भवन में ठहराया गया था.
घर लौटने पर माता-पिता के साथ गाँव के लोग भी खुश थे. सबके मन में शुकून था कि बेटा सुरक्षित घर लौट आया है.

