रांची। झारखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अमित कुमार ने आगामी 3 मार्च को झारखंड सरकार की 2021- 2022 के लिए आने वाली बजट को लेकर कहा कि बजट आम तौर पर राज्य की जनता की बेहतरी के लिए बनाया जाता है। परंतु राज्य की वर्तमान हेमंत सरकार ने जनता के लिए बनने वाले बजट को लेकर राज्य के किसी भी जनता से सुझाव तक नहीं मांगा। जिसे अमित कुमार ने बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार को राज्य वासियों से उनकी जन- आकांक्षाओं के बारे में जानकारी लेनी चाहिए थी।बजट से पूर्व समाज के विभिन्न वर्गों से भी सुझाव मांगना चाहिए था एवं राज्य के व्यवसायियों,उनके व्यसायिक संगठनों,बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों,अर्थशास्त्रियों, किसानों, महिलाओं,गरीबों-शोषितों-वंचितों से भी बजट से पूर्व सुझाव लेनी चाहिए थी।परंतु उन्होंने बजट से पूर्व राज्य वासियों से किसी प्रकार का सुझाव तक नहीं लिया। जिससे राज्य वासियों में काफी नाराजगी है।
उन्होंने कहा कि इसके पूर्व में राज्य की रघुवर सरकार ने बजट पेश करने से पहले राज्य वासियों से सुझाव मांगे थे। भाजपा की अगुवाई वाली रघुवर सरकार ने झारखंड चेंबर एसोसिएशन से लेकर विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक संगठनों से राज्य के लिए बनने वाले बजट के लिए सुझाव मांगे थे।उनकी सरकार में बुद्धिजीवियों,अर्थशास्त्रियों, समाजसेवियों,किसानों,महिलाओं एवं गरीबों-दलितों तथा वंचितों से भी सुझाव लेकर बजट बनाया गया था। ’यहां तक की रघुवर सरकार ने राज्य के विभिन्न स्थानों पर बजट विमर्श संगोष्ठी का आयोजन कर राज्य के आम एवं खास लोगों से बजट के लिए सुझाव मांगे थे। जिसमें राज्य वासियों के सैकड़ों सुझाव दिए गए थे।उन सुझावों को रघुवर सरकार ने राज्य के बजट में भी शामिल किया था। रघुवर सरकार की उस बजट से झारखंड की समृद्धि को चार चार-चांद थे और रघुवर सरकार के बजट को राज्य वासियों ने जमकर सराहा था।वह बजट राज्य के सर्वांगीण विकास का बजट था।
उन्होंने कहा कि जब से राज्य में हेमंत सरकार आई है तब से राज्य की स्थिति बद से बदतर हो गई है। इस सरकार में न तो विकास करने की इच्छा शक्ति है और ना ही इसके प्रति किसी प्रकार की प्रतिबद्धता। जिसके कारण राज्य वासियों में घोर निराशा है। हेमंत सरकार बने इतने दिनों के बाद भी झारखंड के विकास के लिए अब तक कोई ठोस रोडमैप भी तैयार नहीं किया गया है,जिसके कारण झारखंड वासियों की आशा-उम्मीद और आकांक्षा भी वर्तमान सरकार के प्रति धूमिल होती दिखाई पड़ रही है।
राज्य में बढ़ रहे भय-भूख और भ्रष्टाचार के वातावरण में वर्तमान हेमंत सरकार को राज्य वासियों के लिए आने वाले बजट के लिए सुझाव मांगनी चाहिए थी।

