भारतीय शूरवीर चित्तौड़ के महाराज महाराणा प्रताप के प्रति प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान की आरएसएस, विद्या भारती , भाजपा और इससे जुड़े संगठनों ने विरोध किया है. डोटासरा को देश से माफी मांगने की बात कही. डोटासरा ने महाराणा प्रताप के पराक्रम पर सवाल खड़े कर पाप किया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नागौर में कहा था कि महाराणा प्रताप और अकबर के बीच युद्ध सत्ता के लिए लड़ी गई थी. विद्या भारती ने कहा कि महाराणा प्रताप की लड़ाई स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा के लिए लड़ी गई थी, ना कि सत्ता के संघर्ष के लिए.
विद्या भारती राजस्थान क्षेत्र के संगठन मंत्री शिव प्रसाद, अध्यक्ष भरतराम कुम्हार, क्षेत्रीय मंत्री परमेंद्र दशोरा ने डोटासरा के बयान की निंदा की. विद्या भारती के अध्यक्ष भरतराम कुम्हार ने बताया कि अकबर के स्वयं कि जीवनी आइने अकबरी, अकबर नामा, और अब्दुल फजल के अनुसार युद्ध में महाराणा प्रताप जीते पर हमें पुस्तकों में पढ़ाया जा रहा था कि हल्दी घाटी के युद्ध में अकबर के सामने महाराणा प्रताप की हार हुई, ऐसे में सरकार विद्या भारती से प्रेरणा लेकर शैक्षणिक सुधार कर सकती है. महाराणा प्रताप की अत्याचारी अन्यायी अकबर से संघर्ष सत्ता के लिए नहीं अपितु राष्ट्र के गौरव को बचाने का था. हमारे देश की संस्कृति और धर्म के लिए थी.
विद्या भारती के क्षेत्रीय मंत्री परमेंद्र दशोरा ने कहा कि जिन महाराणा प्रताप के नाम से स्वाधीनता की ऊर्जा मिलती है. महाराणा प्रताप के लिए स्वप्न में भी सत्ता संग्राम की कल्पना नहीं की जा सकती. अपने बयान के लिए डोटासरा को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए. यदि डोटासरा को ज्ञान की कमी है तो, विद्या भारती उनका ज्ञान वर्धन कर सकती है.
अकबर एक विदेशी आक्रांता था जिसने भारत की संस्कृति को नष्ट-भृष्ट करने का प्रयास किया. और महाराणा प्रताप देश की अस्मिता स्वतंत्रता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए बिना झुके जीवन भर संघर्ष करते रहे


