उत्तर प्रदेश चुनाव में वोटिंग से पहले ही सपा गठबंधन में दरार पड़ती नजर आ रही है. सपा द्वारा इलाहाबाद पश्चिम सीट से अमरनाथ मौर्य को अपने उम्मीदवार के तौर पर उतारने के बाद गठबंधन का हिस्सा अपना दल कमेरावादी पार्टी ने अपने हिस्से की सीटें वापस करने का फैसला लिया है. अपना दल से अलग होकर बनी कृष्णा पटेल की इस पार्टी को गठबंधन के तहत 18 सीटें मिलने की बात थी, जिनमें से उसने अपने 7 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. लेकिन बाकी सीटें वापस करने की बात कही है. इलाहाबाद पश्चिम सीट को अपना दल के खाते में ही दिया गया था.
इलाहाबाद पश्चिम सीट पर उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अपना दल कमेरावादी ने सभी बाकी सीटों को लौटाने का फैसला लिया है. अब तक अपना दल कमेरावादी को जो सीटें दी गई थीं, उनमें वाराणासी की रोहनिया, पिंडारा, जौनपुर की मड़ियाहूं, मिर्जापुर की एक सीट और सोनभद्र की घोरावाल सीट और प्रतापगढ़ सदर सीट शामिल हैं. इनमें से ही एक सीट इलाहाबाद पश्चिम की थी, जिसमें 27 फरवरी को पहले राउंड को मतदान होना है. अब इस पर सपा की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने से मतभेद बढ़ गए हैं.
अपना दल कमेरावादी के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि ‘हम नहीं चाहते कि गठबंधन में किसी तरह का विवाद या भ्रम रहे. इसलिए हमने सभी सीटों को वापस करने का फैसला लिया है, जो सपा ने अपना दल को लड़ने के लिए दी थीं. सपा उन सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर ले, जिन्हें वह चाहती है. यदि किसी सीट पर कोई विवाद नहीं रहता है तो फिर हमें वह दी जाए.’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे सपा के साथ बने रहेंगे.
उन्होंने कहा कि हमने अपनी पार्टी की ओर से सीटें लौटाने के फैसले की जानकारी उदयवीर सिंह को दे दी है, जो दोनों दलों के बीच गठबंधन को देख रहे हैं. हमें अब सपा की ओर से जवाब का इंतजार है. हालांकि सपा के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि उन्हें अपना दल कमेरावादी की ओर से लिए गए फैसलेके बारे में जानकारी नहीं है.

