झारखण्ड में शिक्षा की स्थिति सुधरने के लिए गुरुवार को सदन पर चर्चा हुई. शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने सरकार की उपलब्धियां गिनाई. कहा कि पिछली सरकार ने शिक्षा को गर्त में मिला दिया था. हम धरातल पर काम करते है. हमारी सरकार बनी तो पारा शिक्षकों की समस्या का समाधान किया. विपक्ष के सवालों का मंत्री के जवाब के बाद सदन में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के 6 करोड़ 37 लाख 75 हजार का अनुदान मांग ध्वनिमत से पारित हुआ. मंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा का स्तर सुधारना है तो सारे मंत्री, विधायक और अफसरों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना चाहिए, विपक्षी पार्टी के लोग इस संबंध मे प्रस्ताव दें, वह इसे पारित कराएंगे.
भाजपा विधायक अनंत ओझा ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर नहीं सुधरने पर सरकार निजी हाथों में इसके संचालन की जिम्मेवारी सौंपने की बात करती है, इसी से राज्य में शिक्षा के स्तर का पता चल जाता है. झामुमो, राजद और कांग्रेस के द्वारा शिक्षा की स्तर में बेहतरी के लिए कई वादे किए गए थे, लेकिन निश्चय पत्र पर कोई काम नहीं हुआ.
बंधु तिर्की ने कहा कि भाषा संरक्षण के लिए जनजातीय/क्षेत्रीय भाषा एकेडमी के गठन की मांग की. साथ ही सुदूर जंगलों में सरना आदिवासियों द्वारा चलाये जा रहे कच्चे माकन झोपड़ी में चलाये जा रहे विद्यालय को चिह्नित कर मदरसा की तरह अनुदान राशि दिये जाने की मांग की. शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य से दूर रखा जाए.

