अगर आप कुछ नया करने का मन बना रहे है और इन्टरनेट पर उससे सम्बंधित कस्टमर केयर का नम्बर खोज रहे है तो सावधान हो जाइए. क्योंकि इन्टरनेट पर साइबर अपराधी आपकी एक गलती का इंतजार में है. आप इन्टरनेट में सर्च के दौरान पहले से अपराधी द्वारा डाले गये फर्जी कस्टमर केयर वाले नम्बर पर कॉल करेंगे और कुछ देर के आपका बैंक अकाउंट खाली हो जायेगा. जी हाँ, ऐसे ही एक मामले में दिल्ली पुलिस ने झारखण्ड के दुमका से दो लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने इन साइबर अपराधियों के पास से आठ बैंक खाता को जब्त कर इन खातों को सील कर दिया है. जानकारी के अनुसार इन खातो में करीब 82 लाख रूपये कम थे. जो फर्जीवाडा कर इन खातों में जमा किये गये थे.
मामला तब सामने आया जब एक पीड़ित से 4.78 लाख की ठगी हो गयी जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में कहा गया है कि सात जनवरी को ‘मेक माई ट्रिप’ वेबसाइट का कस्टमर केयर खोज रहा जिसमे उसे आरोपी का नंबर मिला. आरोपी ने फोन पर पीड़ित से बात करते हुए खुद को ‘मेक माई ट्रिप’ कंपनी का कर्मचारी बताया. इसके बाद पीड़ित ने आरोपी द्वारा फोन पर भेजे गए एक फॉर्म को भरा और ‘एनीडेस्क ऐप’ को इंस्टाल किया. इसके बाद पीड़ित के एचडीएफसी बैंक खाते से 4,78,278 रुपये निकल गए.
पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 22 साल के अभिषेक कुमार और राजू अंसारी को झारखंड के दुमका से गिरफ्तार किया गया.पुलिस ने कहा कि मुख्य साजिशकर्ता कुमार, विभिन्न कस्टमर केयर वेबसाइट के नाम से इंटरनेट पर अपना फोन नंबर डालता था. वह पिछले छह महीने से इस गिरोह का संचालन कर रहा था और उसका साथी अंसारी पश्चिम बंगाल स्थित अपने गांव आसनसोल से बैंक खातों की व्यवस्था करता था.
पुलिस उपायुक्त (शाहदरा) आर. सत्यसुन्दरम ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी अभिषेक ने स्वीकार किया कि उसने फ्लिपकार्ट, मेक माई ट्रिप, एयरलाइन्स इत्यादि के कस्टमर केयर सहायता के नाम से गूगल एड्स पर अपना फोन नंबर डाला था. पीड़ितों के कॉल आने के बाद वह उनसे एक फॉर्म भरने को कहता था और एनी डेस्क ऐप इंस्टाल करने को कहता था. अधिकारी ने कहा कि ऐप इंस्टाल करने के बाद वह ऐप के माध्यम से पीड़ित के फोन की स्क्रीन की निगरानी करता था और एक अन्य ऐप के जरिये बैंक के एसएमएस पढ़ लेता था. डीसीपी ने कहा कि बैंक का विवरण जानने के बाद वह पीड़ित के खाते से पैसे निकाल लेता था.

