दीपांकर ने कहा कि देश के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की साझी अपील पर कोराना और अन्य सन्दर्भों में मारे गए लोगों का शोक मनाने का एक बड़ा अभियान चल रहा है। सरकारें चाहती हैं कि हम इन मौतों को भूल जाएं, लेकिन हम हर एक मौत पर सवाल पूछेंगे और हिसाब लेंगे। गांव-गांव में मारे गए लोगों के परिजनों से बातचीत और उनका दुख जानने का प्रयास किया जा रहा है। 27 जून को पूरे राज्य में एक बार फिर से ‘अपनों की याद’ कार्यक्रम को किया जाएगा। इसमें कोविड काल में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी
माले के राज्य सचिव कुणाल और पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा ने कहा कि कोविड काल में हुई मौतों की सूची बनाने का कार्य जारी है। अभी तक कुछ जिलों से जांच की एक प्राथमिक रिपोर्ट भी मिली है। भोजपुर, पटना, अरवल, जहानाबाद, सीवान, बक्सर और दरभंगा से आई प्राथमिक जांच रिपोर्ट सरकार के झूठ का पर्दाफाश करती है। पार्टी अस्पतालों का भी एक सर्वेक्षण अभियान चला रही है। यह रिपोर्ट जल्द ही बिहार सरकार को सौंपी जाएगी। मांग की कि पटना उच्च न्यायालय अपनी देखरेख में मौतों की जांच कराए। कोविड काल में हुई हर एक मौत के लिए सरकार पर 4 लाख रुपए मुआवजा देने का दबाव बनाएंगे। भोजपुर में सरकार बता रही कि महज 102 मौतें हुई हैं, जबकि माले के आंकड़ों के अनुसार कोविड लक्षण से 1424 मारे गए हैं। 178 अन्य मौतें हुईं। यानी 1602 लोगों की मौत हुई। एक भी व्यक्ति को अब तक मुआवजा नहीं मिला है

