लड़की के अगर नाबालिग है तो शादी या यौन सम्बन्धों पर सहमति का कोई मूल्य नहीं है. पीड़िता नाबालिग है तो उसके अभियुक्त के साथ प्रेम प्रसंग का कोई अर्थ नहीं है, अभियुक्त को उस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती. उक्त बातें सुप्रीम कोर्ट ने झारखण्ड के एक मामले में अपने एक फैसले के दौरान कही. साथ ही मामले के अभियुक्त की जमानत रद्द कर उसे तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया. अभियुक्त को झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत को पीड़िता (13) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
गौरतलब हो कि अभियुक्त (20 वर्ष) को रांची में आईपीसी की धारा 376 और पोक्सो की धारा 6 के तहत जेल भेजा गया था. लेकिन हाईकोर्ट ने अगस्त 2021 को याचिकाकर्ता और अभियुक्त के बीच में प्रेम प्रसंग था को आधार बताते हुए उसे जमानत दे दी थी. बता दें कि मामले के अनुसार अभियुक्त उसे झांसा देकर होटल में ले गया था और उसे शादी करने का झांसा देकर रेप किया. बाद में उसने इसकी वीडियो क्लिप भी लड़की के पिता को भेजी थी. पीड़िता को शादी से मना करने के बाद केस दर्ज किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब अपराध हुआ उस समय पीड़िता 13 साल कुछ माह की थी, हाईकोर्ट को इस आधार पर उसे जमानत नहीं देनी चाहिए थी. क्योंकि 13 साल की लड़की कानूनन यौन संबंधों पर अपनी सहमति नहीं दे सकती. लव अफेयर का कानून से कोई संबंध नहीं है.

