झारखण्ड/सेन्हा : सेन्हा के जोगना मोड़ मैदान में एककुण्डिय महायज्ञ एवम श्रीमद्भागवत कथा आयोजन के आंठवे दिन श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन का चित्रण किया गया. इस दौरान सुश्री व्यास किशोरी वैष्णवी ने कथा को आगे बढ़ाते हुए बतलायीं कि मित्रता से अनमोल कोई धन नहीं. इसका उदाहरण स्वयं विष्णु भगवान ने धरती में अपने परम अवतार श्रीकृष्ण के माध्यम से बहुत ही अच्छे तरीके से समझाया है. जब बचपन के मित्र एक दरिद्र ब्राह्मण सुदामा द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण से मिलने जाते है, तो भगवान सारे संसार के सुख व अपनी सुध बुद्ध खोकर अपने उस दरिद्र ब्राह्मण मित्र सुदामा के सेवा में खो जाते हैं और पानी के स्थान पर अपने अश्रु से उनका चरण को पघारते हैं. ततपश्चात सुदामा के द्वारा लाये गये उपहारस्वरूप मुठ्ठी भर चावल को इतने आंनद पूर्वक सेवन करते हैं जैसे तीनों लोक में उससे बढ़कर कोई दूसरा उपहार हो ही नहीं सकता. इतना मान एक सच्चा मित्र ही अपने दूसरे मित्र को दे सकता है. इस भावुक क्षण को देखकर कितने ही उपस्थित भक्तगण अपने आँखों से आँसू के क्षलकने से रोक नहीं सके.
बीच -बीच मे मंत्रमुग्ध कर देने वाले सुश्री व्यास किशोरी वैष्णवी के मधुरवाणी में भजन का होना, पूरे आस पास के वातावरण के इस प्रकार सजा देती है कि उपस्थित सारे भक्त भगवान श्रीकृष्ण के भक्ति के परम सुख में खो जाते हैँ, नतीजा यह होता है कि कथा के घन्टों समय बीतने के बावजूद भक्त पूरे भीड़ के साथ कथा श्रवण करते रहते हैं. समय का पता हीं नही चलता है. हमलोग सौभाग्यशाली हैं कि सुश्री व्यास किशोरी वैष्णवी जी के मधुर वाचन में लगातार नौ दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा सुनने का मौका मिला एवम साथ ही साथ भजन का अनुश्रवण भी किये.

