कोडरमा उपायुक्त आदित्य रंजन ने जिला के गांवों की दशा सुधारने के लिए अलग पहल की है. ग्रामीणों के साथ गाँव गाँव बैठक कर लोंगो को जागरूक कर रहे है. सरकारी योजनाओं से गांवों के विकास को लेकर खाका तो खींचा जाता रहा है और इसी अनुरूप काम होते रहे हैं, पर कई बार काम धरातल पर उस अनुरूप पूरा नहीं हो पता है. कोडरमा जिला प्रशासन इस बार अलग पहल करने की तैयारी में है. जिले के कुछ गांवों को पूरी तरह स्वावलंबी बनाने की दिशा में काम शुरू किया गया है. आनेवाले दिनों में इन गांवों में स्थानीय ग्रामीणों की मदद से ही तस्वीर बदलने की कोशिश होगी. इसके लिए जिला प्रशासन ने पहल शुरू की है. . गांव के लोगों को श्रमदान से अपने आसपास बदलाव लाने को लेकर प्रेरित किये जाने की शुरुआत हुई है. स्वावलंबी गांव बनाने के लिए सबसे पहले ग्वरामीणों को जागरूक करना होगा. लोग अपनी जिम्हांमेवारी समझे. वातावरण बदलेगा तो विकास भी होगा
जानकारी के अनुसार पहले फेज में कोडरमा प्रखंड के कमयडीह, नईटांड और बनौता फुलवरिया गांव का चयन स्वावलंबी गांव के रूप में विकसित करने को लेकर किया गया है. इसके बाद चंदवारा प्रखंड के पिपराडीह और जयनगर के तमाय पंचायत में भी इस तरह की पहल होगी. गांवों को स्वावलंबी बनाने को लेकर ग्रामीणों को जागरूक व एकजुट कर काम किया जायेगा. लोगों को शिक्षा के साथ कृषि, पर्यावरण संरक्षण एवं साफ-सफाई के क्षेत्र में श्रमदान कर बदलाव लाने को प्रेरित करने की तैयारी है. इसके अलावा अन्य बिंदुओं पर भी स्थानीय ग्रामीणों की मदद से ही बदलाव लाने की कोशिश होगी.

