रांचीः मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि 1 महीने के अंदर सरकार द्वारा 10 बांस कारीगरों को वियतनाम और चीन भेजा जाएगा ताकि, वे उन्नत तकनीक सीखकर यहां के बांस कारीगरों को भी नए-नए तकनीक से अवगत कराएं. राज्य सरकार कई ऐसे कार्य करने जा रही है, जिससे संथाल परगना के बांस कारीगरों के साथ-साथ पूरे झारखंड के बांस कारीगरों को एक नई पहचान मिलेगी. निवेशकों से कहा कि सरकार उद्योग स्थापित करने में हर तरह से सहयोग करेगी. निवेशकों द्वारा लगाए उद्योग में रोजगार पाने वाले झारखंड की महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षण देने का खर्च भी सरकार वहन करेगी. समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाना है. एक नई सोच के साथ कार्य करने की जरूरत है. सीएम गुरुवार को दुमका में बांस कारीगर मेला के समापन समारोह में बोल रहे थे.
बांस से बनी सामग्री पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाए
झारखंड के बांस से बनी सामग्री पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाए यही सरकार का प्रयास है. मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में देश ही नहीं, विदेशों के बाजार में भी झारखंड के हस्तशिल्पकारों के उत्पाद नजर आएंगे. हुनरमंद युवाओं और महिलाओं के अंदर छिपी कला को निखारना, अत्याधुनिक तकनीक से अवगत करा उनसे बेहतरीन उत्पाद का निर्माण करा उनकी कला को सम्मान व उनका मान बढ़ाना सरकार की मंशा है. इस दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है.
दुनिया तकनीक, ज्ञान और विज्ञान के साथ बढ़ रहा है, झारखंड पीछे क्यों रहे
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड संभावनाओं से भरा प्रदेश है. कुटीर उद्योग, लघु, ग्राम उद्योग अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है. सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधारने का कार्य कर रही है. पूरी दुनिया तेजी से तकनीक, ज्ञान और विज्ञान के साथ बढ़ रहा है. झारखंड किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं रहे. यहां के भी बांस कारीगर नई-नई तकनीक को जाने तथा उसका उपयोग करें. निश्चित रूप से आने वाले दिनों में झारखंड दुनिया के सामने आर्थिक रुप से सुपर पावर के रूप में जाना जाएगा. राज्य सरकार ने सभी क्षेत्रों में कई कार्य किए हैं. विकास की नई लकीर खींचने का कार्य सरकार ने किया है. हम तेजी से विकास करने में विश्वास रखते हैं. पिछले 14 वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता के कारण झारखण्ड विकास के मामले में पीछे रह गया. हमें मिलकर उसकी भरपाई जल्द से जल्द करनी है.
झारखंड में निर्मित बांस के सामग्री की गुणवत्ता पूरे देश में सबसे अच्छी
झारखंड में निर्मित बांस के सामग्री की कवालीटी पूरे देश में सबसे अच्छी है. झारखंड वनों से भरा प्रदेश है. झारखंड के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 33% वन है. यहां के युवाओं , महिलाओं को हुनरमंद बनाकर हम वन से उत्पादित उत्पाद को वैल्यू एडेड कर उनके आय को बढ़ा सकते हैं. सरकार ने बांस कारीगर मेला का आयोजन कर इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने का कार्य किया है. मेला आयोजन का मुख्य उद्देश्य संथाल परगना के साथ साथ झारखंड के बांस कारीगरों को नई-नई तकनीक के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे बेहतर उत्पाद का निर्माण कर सके, जिसकी मांग पूरे विश्व में हो. सरकार लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के माध्यम से छोटे-छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है.
20 करोड़ बांस के पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग तथा उद्योग विभाग द्वारा 20 करोड़ बांस के पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे. 5 साल का डेवलपमेंट प्लान तैयार किया जा रहा है. संथाल परगना में अंतरराष्ट्रीय स्तरीय इंटीग्रेटेड बंबू पार्क की स्थापना की जाएगी ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के सामग्री का उत्पादन हो सके. आने वाले दिनों में बांस से निर्मित सामग्रियों के क्षेत्र में हम चीन व वियतनाम की बराबरी कर सकेंगे.
नवीन तकनीक का किया जा रहा है निर्माणः उद्योग सचिव
उद्योग सचिव के रवि कुमार ने कहा कि 6 लाख परिवार बांस उद्योग से जुड़े हुए हैं, जिससे बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध हुए हैं. इस क्षेत्र में रोजगार को और बढ़ावा मिल सके इसके लिए तीन CFC का उद्घाटन हमारे माननीय मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास के द्वारा किया जाएगा. कारीगरों के स्किल को ध्यान में रखकर न्यू टेक्नोलॉजी का निर्माण किया जा रहा है. आज बांस उद्योग के क्षेत्र में इतना बढ़ावा मिला है कि टाटा स्पंच के द्वारा मेट खरीदा जा रहा है. अगले पांच सालों में बांस की खेती के लिए एक्शन प्लान तैयार किया गया है, ताकि बांस कारीगरों को उनके गांव व घरों में रहकर रोजगार उपलब्ध हो सके. इस मौके पर मंत्री डॉ लुईस मरांडी, सांसद सुनील सोरेन, उद्योग निदेशक कृपानंद झा, उपायुक्त दुमका श बी राजेश्वरी, डीआईजी राजकुमार लकड़ा, आरक्षी अधीक्षक वाई एस रमेश समेत कई अधिकारी मौजूद थे .

