नई दिल्ली: भारत-चीन संबंधों में तनातनी के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर चीन और रूस के विदेश मंत्रियों की साथ बैठक में शामिल हुए. गलवन घाटी में सैन्य झड़प के बाद भारत-चीन के विदेश मंत्री विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पहली बार आमने-सामने हैं.
बैठक के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारत और चीन को किसी दूसरी की कोई मदद चाहिए, खासकर जब दोनों देशों का यह अपना मामला है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं को लेकर दोनों देशों के बीच फैले तनाव को भारत और चीन अपने दम पर हल कर सकते हैं.
वहीं, बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया की प्रमुख आवाजों को हर तरह से सुना जाना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना, साझेदारों के हितों को पहचानना, बहुपक्षवाद का समर्थन करना और अच्छाई को बढ़ावा देना ही टिकाऊ विश्व व्यवस्था बनाने का एकमात्र तरीका है.
उन्होंने कहा कि यह विशेष बैठक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के टाइम टेस्टेड प्रिंसिपल में हमारे विश्वास को दोहराती है, लेकिन आज की चुनौती अवधारणाओं और मानदंडों की नहीं, बल्कि इसके समान रूप से अभ्यास की है.
पूर्वी लद्दाख की गलवन घाटी में 15 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष के बाद टकराव और बढ़ने की आशंकाओं के बीच रूस के आग्रह के बाद यह वार्ता हो रही है. भारत पहले इस आरआइसी बैठक में शामिल होने को लेकर तैयार था, लेकिन सम्मेलन के मेजबान रूस के आग्रह के बाद वह इसमें शामिल होने पर सहमत हो गया.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 17 जून को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत में कहा था कि यह चीनी सेना की पूर्व नियोजित साजिश थी और इसका द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को पुष्टि की थी कि जयशंकर आरआइसी बैठक में शामिल होंगे. उन्होंने कहा था कि बैठक में कोविड-19 महामारी तथा वैश्विक सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता संबंधी चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी.

