राजेश तिवारी,
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वितरण निगम का प्रशासनिक खर्च 215.03 करोड़, सालभर में बढ़ गया 33.91 करोड़ रुपये
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झारखंड राज्य बजली वितरण निगम की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ खुलासा
रांचीः राज्य में बिजली की आंख मिचौनी जारी है. कोई दिन ऐसा नहीं कि पावर कट न हो. पत्ता भी खड़कता है तो बिजली कट जाती है. कई सरकारें आई और गईं, लेकिन झारखंड की बिजली व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पाया.
राज्य गठन के बाद से एक मेगावाट उत्पादन भी नहीं बढ़ा. बिजली व्यवस्था सुधरे या न सुधरे लेकिन प्रशासनिक खर्च करोड़ौं रूपए बढ़ गया. इसका खुलासा खुद वितरण निगम की ऑडिट रिर्पोट में हुआ है.
प्रशासनिक खर्च में 34 करोड़ रुपए की वृद्धि-
वितरण निगम का प्रशासनिक खर्च जो 181.12 करोड़ था जो बढ़कर 215.03 करोड़ हो गया. यानी, एक साल में बिजली विभाग का प्रशासनिक खर्च 33.91 करोड़ रूपये बढ़ गया. परामर्श लेने में 14.61 करोड़ रुपये खर्च कर दिये.
तकनीकी शुल्क में 20 लाख रुपये ही खर्च हुए हैं. लीगल चार्ज में 4.34 करोड़ रुपये खर्च कर दिये गये हैं. वाहन पर 4 करोड़ रुपए से भी अधिक खर्च किए गए हैं.
प्रशासनिक खर्च के आंकड़े इस प्रकार हैं-
- रेंट में खर्च- 56.80 लाख रुपये
- इंश्योनरेंस-21.49 लाख
- टेलीफोन-3 करोड़
- लीगल चार्ज-4.34 करोड़
- परामर्श- 14.61 करोड़
- टेक्निकल फीस-20 लाख
- प्रोफेशनल चार्ज-51.99 लाख
- ट्रैवलिंग-3.52 करोड़
- वाहन-2.57 करोड़
- वाहन हायर में खर्च-4.58 करोड़
- विज्ञापन-38 लाख
