बेतिया: बेतिया पश्चिम चम्पारण जिला अन्तर्गत नरकटियागंज प्रखंड क्षेत्र के डीके शिकारपुर नरकटियागंज से एक 15 माह के बच्चे के इलाज कराने हेतु परिजन अजहरुद्दीन अंसारी बेतिया के प्रसिद्ध डाक्टर अनिल मोटानी के क्लिनिक जनता सिनेमा चौक पर लेकर आए.सुबह 7 बजे क्लिनिक के स्टाफ ने बताया कि फीस 400 जमा कर दिजिए डाक्टर साहब बैठेंगे तो देख लेंगे और यदि इमर्जेंसी में तत्काल दिखाना हो तो 600 रूपया फीस लगेगा. चुंकि बच्चे की हालत खराब थी इसलिए परिजनों ने इमर्जेंसी फीस जमा कर डॉक्टर को दिखाया और डॉक्टर ने बच्चे को देखकर परिजनों को बोले घबराए मत कुछ लैब टेस्ट लिख दिया. तब परिजन बच्चे को लेकर मार्डन लैबोरेट्री में लेकर गए.
जांच घर ने 1 बजे रिपोर्ट देने की बात कह कर उन्हें क्लिनिक में भेज दिया. बच्चे की हालत जब धीरे-धीरे खराब होने लगी तो जांच घर को फोन कर जल्दी रिपोर्ट मंगवाया गया और रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू किया परन्तु बच्चे की हालत चिंताजनक होती गई. परिजनों ने बार बार बच्चा को इलाज बेहतर करने को कहा परन्तु कम्पाउंडर ने उसे फीवर बढ़ने के कारण नहला दिया. उसके बाद भी बच्चा का हालत बिगड़ते गया और लगभग 1 बजे के करीब बच्चा की मौत हो गई.
बच्चे की मौत पर परिजनों ने डाक्टर और कम्पाउंडर पर इलाज में कोताही का आरोप लगा कर हंगामा किया.
डॉक्टर अनिल कुमार मोटनी क्लिनिक पर नहीं थे परन्तु वहां उपस्थित कम्पाउंडर ने अपने मोबाइल से डॉक्टर साहब से बात करवाया और डाक्टर अनिल कुमार मोटानी ने बताया कि बच्चा जब आया था तभी सीरीयस था और जांडिस के लक्षण भी थे. मैंने जांच करवाने के लिए लिखा और परिजन जांच करवाने गए और उधर से ही सरकारी अस्पताल लेकर चले गए और जब बच्चे को लेकर पुनः क्लिनिक आए तो बच्चे की मौत हो चुकी थी. मेरे यहां इलाज करते समय मौत नहीं हुई है. फिर भी उनके हंगामा करने के कारण मैंने पुलिस को फोन से सूचना देकर बुलवाया. परिजनों का आरोप झूठा है.

