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लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले के खिलाफ नागरिकों ने किया विरोध प्रदर्शन

by bnnbharat.com
September 15, 2020
in समाचार
हिंसा मामला: अब तक 167 पर प्राथमिकी दर्ज, 885 गिरफ्तार
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन दिल्ली पुलिस की अलोकतांत्रिक भूमिका की जांच कराए जाने की मांग की

रांची. वाम दलों की ओर से यूएपीए जैसे काले कानून के तहत दिल्ली दंगों में तथा कथित षड्यंत्र रचने के आरोप मे उमर खालिद की हुयी गिरफ्तारी और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के योगेन्द्र यादव, जेएनयू की प्रोफेसर जयति घोष, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर  अपूर्वानंद, वृत्त चित्र निर्माता राजीव राय समेत कई प्रख्यात नागरिकों को केंद्र सरकार के के अधीन दिल्ली पुलिस द्वारा झूठे आपराधिक मुकदमे मे फंसाये जाने की कार्रवाई का रांची के नागरिक कड़ी भर्त्सना की गयी है.

यह गिरफ्तारी यूएपीए मे गिरफ्तार जेएनयू की नतासा नारवाल, देवांगना कलिता कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां, जामिया की छात्रा मीरान हैदर, राजद के युवा नेता आशिफ तन्हा, एक्टिविस्ट सफुरा जागर, गुलसिफा फातिमा और सिफर-उल रहमान की अगली कड़ी है.  दिल्ली के भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए जहरीले भाषण के बाद हुए दंगों मे उन नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि इन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय का संरक्षण मिला हुआ था.

लेकिन सीएए के खिलाफ चल रहे आंदोलन मे शामिल इन युवाओं को लक्षित कर डरावने काले कानून यूएपीए मे गिरफ्तार करने का निर्देश केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा दिल्ली पुलिस को दिया गया ताकि इन्हें जेलों मे सड़ाने का काम किया जा सके.

  यूएपीए जैसे घोर अलोकतांत्रिक प्रावधान ने सामान्य न्याय की प्रक्रिया को अवरुद्ध कर दिया है और इसका उपयोग लोकतान्त्रिक आन्दोलनों को दबाने और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले करने के लिए किया जा रहा है. निचली अदालतों मे यूएपीए के अंतर्गत गिरफ्तार निर्दोष लोगों को बेल नहीं मिल पाता है. यूएपीए के मामले में कई अदालतों ने स्पष्ट टिप्पणी की है आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कोई सबूत  पुलिस पेश नहीं कर पायी है. दिल्ली मे इसका इस्तेमाल सीएए का विरोध करने वालों को लक्ष्य कर उन्हें दिल्ली दंगों का आरोपी बनाए जाने के लिए किया जा रहा है.

 हम यह मांग करते है कि गृह मंत्रालय के अधीन दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा द्वारा लक्ष्य किए गए प्रगतिशील प्राध्यापकों, एक्टिविस्टों और बुद्धिजीवियों को सम्मन जारी कर उनसे पूछताछ की कसरत अविलंब बंद की जाय. प्रगतिशील और वाम शक्तियों द्वारा संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह शुरू से ही सीएए – एनआरसी – एनपीआर का विरोध  किया जाता रहा है. इसके नाम पर केंद्रीय सरकार द्वारा लोगों का दमन किए जाने की कार्रवाई की हम भर्त्सना करते हैं और दमन के शिकार लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए मांग करते हैं कि दिल्ली दंगों के मामले मे यूएपीए के तहत गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाय. हम यह भी मांग करते है कि दिल्ली दंगे की  स्वतंत्र जांच उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त जज से करायी जाए इस जांच मे गृह मंत्रालय के अधीन दिल्ली पुलिस की पूर्वाग्रह से ग्रसित भुमिका को भी शामिल किया जाय.

    उपरोक्त मांगों के साथ आज राजधानी रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर  वामदलों, जन संगठनों, सामाजिक संगठनों, सिविल सोसाइटी के लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों के अलावा   रांची के शाहीन बाग (कडरू) आंदोलन मे शामिल महिलाओं ने शारीरिक दुरी और स्वास्थ्य मंत्रालय के एडवाइजरी का पालन करते हुए विरोध प्रदर्शन आयोजित किया.

     इस  विरोध कार्रवाई मे  सीपीएम के प्रकाश विप्लव, भाकपा (माले) के जनार्दन प्रसाद, सीपीआई के अजय सिंह, मासस के सुशांत, समीर दास, प्रफुल्ल लिंडा, सुखनाथ लोहरा, प्रकाश टोप्पो, भुवनेश्वर केवट,शुभेंदु सेन,नदीम खान, जयंत पान्डे, वीणा लिंडा, नौरीन, रेणू प्रकाश, मोहन दत्ता, प्रवीर पीटर और विजय वर्मा समेत कई प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लिया.

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