मानसून सत्र के तीसरे दिन शुरू होते ही JMM के विधायक कुणाल सारंगी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि केंद्र सरकार के द्वारा 1927 का वन अधिनियम में संशोधन का प्रयास असंवैधानिक है. राज्य की जनता का इसके तहत दोहन होगा , वन अधिकारी जनता को प्रताड़ित करेंगे.
इसके बाद दूसरा प्रस्ताव कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी द्वारा दिया गया, और कहा कि क्षेत्र में योजनाओं के नाम पर जमीन को कारपोरेट घराने को दिया जा रहा है जिससे पलायन की स्थिति है.लोग बेरोजगारी से मजबूर होकर पलायन करने को मजबूर हैं और दूसरे शहरों में उन्हें रोजगार भी नहीं मिल रहा है. मौतें भी हो रही है जिसके लिए सरकार उचित मुआवजे की व्यवस्था नहीं कर रही है.
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वनाधिकार अधिनियम संशोधन के नाम पर नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन समेत स्टीफन मरांडी, कांग्रेस के सुखदेव भगत ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य में इसको लेकर वह कितनी सजग है, और क्या व्यवस्था कर रही है.
इस मुद्दे पर सरकार की ओर से मुख्य सचेतक राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है.इस बात पर सदन में काफी देर तक हंगामा होता रहा और 40 मिनट तक स्पीकर की तल्खी भी दिखी.स्पीकर ने कहा कि विपक्ष जबरदस्ती ना करें,सदन को चलने दिया जाए लेकिन झामुमो और विपक्ष शांत नहीं हुआ और अपने सीट पर खड़े होकर नारेबाजी करता रहा.
वहीं सत्ता पक्ष के लोगों ने भी कहा कि विपक्ष बेवजह ही रुकावट डाल रहा है. कई महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा होनी थी लेकिन विपक्ष नहीं चाहता है की जनकल्याण की बातें सदन के अंदर हो.

