शशिभूषण दूबे, कंचनीय,
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 331अनुदानित महाविद्यालय व विश्वविद्यालय अनुमोदित शिक्षक संघ के शिक्षकों की एक बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से गुरुवार को हुई. बैठक को संबोधित करते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ केएस पाठक ने कहा कि सपा, बसपा एवं भाजपा की सरकारों ने शिक्षकों को विनियमितीकरण की आस तो दिखाई लेकिन वह आस पूरी नहीं हो सकी. बल्कि उसकी आड़ में प्रदेश के कई महाविद्यालयों में कोरोना काल के दौरान ना तो शिक्षकों को वेतन दिया गया ना ही उनका भविष्य निधि काटा गया। उल्टे उन्हें महाविद्यालयों से निकालने की धमकी दी जा रही है। प्रदेश के कई महाविद्यालयों में कर्मचारियों का निष्कासन भी हो रहा है, जो बर्दास्त के बाहर है.
संघ के प्रदेश संयोजक डॉ अजय कुमार एवं सहसंयोजक डॉ विनोद कुमार सिंह ने कहा कि कई महाविद्यालयों में छह माह से शिक्षकों को वेतन नहीं मिला है. संगठन महामंत्री डॉ एसएन त्रिपाठी ने कहा कि सरकार दोहरा चरित्र निभा रही है, जो उसके हित में नहीं है. संघ के उपाध्यक्ष डॉ दिलीप शुक्ला, डॉ पुष्प लता एवं डॉ नितेश यादव ने सरकार से मांग की कि यदि शिक्षकों का शोषण बंद नहीं हुआ तो शिक्षक सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदार सरकार की होगी. संघ की विनियमितीकरण की मांग 20 वर्षों से 331 महाविद्यालयों के करीब 3663 अनुमोदित शिक्षकों का विनियमितीकरण करने के लिए, सरकार तत्काल कोई न कोई कदम उठाएं. जिससे सबका साथ सबका विकास वाली कहावत सही हो सके.
डॉ एसके शुक्ला महामंत्री ने कहा कि शिक्षक माफियाओं के हाथ की कठपुतली सरकार बनी हुई है. मंत्री डॉ राजेश मिश्रा ने सरकार को चेतावनी देते हुए, कहा कि यदि प्रदेश में निकाले गए शिक्षकों को वापस नहीं लेती है, तो शिक्षक चुप नहीं बैठेंगे. संयुक्त मंत्री डॉ एनके सिंह ने कहा कि शिक्षा माफिया प्रदेश में विषय तोड़ने की धमकी दे रहे हैं.
बैठक में डॉ अनंत त्रिपाठी, डॉ डीएस शुक्ला, डॉ डीएस सिंह, डॉ एससी शुक्ला, डॉ श्याम चौधरी, डॉ अहमद काजमी सहित तमाम शिक्षकों ने अपने विचार व्यक्त किए.

