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तालमखाना जिसे इक्षुगंधा भी कहते हैं, जानिए इसके औषधीय गुण : वनौषधि – 38


प्रचलित नाम– तालमखाना, कोकिलाक्ष, इक्षुगंधा।

प्रयोज्य अंग– मूल, पत्र, बीज।
स्वरूप– एक छोटा कंटक युक्त क्षुप जो नमी वाले स्थानों पर उगता है। कंटक पीले, प्रतयेक पर्व पर 6-6 की संख्या में, पत्ते 6-6 के चक्र में,
पुष्प नीले बैंगनी रंग के होते हैं।
स्वाद-तिक्त ।

रासायनिक संगठन– इसके बीज में पीतवर्णी स्थिर तेल, डायास्टेस, लायपेस एवं प्रोटियेस पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त पोटेशियम के लवण तथा पिच्छिल द्रव्य पाये जाते हैं।

गुण-शीतल, मूत्रल, मधुर, शुक्रवर्धक, स्तन्य जनन, बल्य ।

उपयोग-जलोदर, मूत्रकृच्छ्र, बस्थिशोध, कामला, वातरक्त, शोथ, यकृतोदर, यकृत में अवरोध होने के कारण उत्पन्न शोथ में, अश्मरी, नेत्ररोग में लाभकारी।
इसके बीजों का दूध के साथ सेवन से बस्थिशोथ में लाभ होता है।
मूल के क्वाथ के सेवन से मूत्र में वृद्धि होती है।
यकृत रोग में मूल के क्वाथ का सेवन लाभकारी।
कास रोग में पत्तों का उपयोग लाभकारी ।
संधिशूल में इसके पत्रों को पीसकर लेप करना लाभकारी।
शोथ में इसके पंचांग की राख का गोमूत्र या जल के साथ सेवन से लाभ होता है।
बाजीकरण के लिये इसके बीज एवं कौंच के बीजों का चूर्ण में शर्करा मिलाकर जल के साथ सेवन से लाभ।
अतिसार में इसके पंचांग को दही में पीसकर सेवन कराना चाहिए।
क्षतकास में इसके पंचांग के चूर्ण में मधु तथा ताजा घी मिला कर सेवन करने से लाभ होता है।
धातु पुष्टता के लिए इसके पंचांग के चूर्ण का सेवन मिश्री के साथ करें तथा ऊपर से ऊष्ण दूध पीने से लाभ होता है। या तालम खाना, मूसली एवं गोक्षुर का चूर्ण गाय के दूध में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होता है।
प्रमेह में तालम खाना को दूध में उबालकर पीने से लाभ होता है।
योनि संकोचन के लिये इसके पंचांग के क्वाथ में तालमखाना का चूर्ण मिलाकर योनी के अंदर इसका लेप करने से लाभ होता है।
मात्रा-क्वाथ-चार तोला, चूर्ण-दो से चार माशा, क्षार-दो से पाँच रत्ती।


अन्य भाषाओं में तालमखाना के नाम

कोकिलाक्ष या तालमखाना का वानास्पतिक नाम Hygrophila auriculata (Schumach) Heine (हाइग्रोफिला ऑरीकुलाटा)Syn-Hygrophila spinosa T. Anders होता है। इसका कुल Acanthaceae (ऐकेन्थेसी) होता है। और इसको अंग्रेजी में Marsh barbel (मार्श बारबेल) कहते हैं। लेकिन इसके अलावा भी अन्य भाषाओं में दूसरे नामों से भी तालमखाना को पुकारा जाता है।
Talmakhana in –
• Sankskrit-कोकिलाक्ष, काकेक्षु, इक्षुर, क्षुर, भिक्षु, काण्डेक्षु, इक्षुगन्धा और इक्षुबालिका;
• Hindi-तालमखाना, कोकिला आँख गोकुलकाँटा, जुलीआकाण्टा, तालमखाना, ऊँटकटरू;
• Urdu-तालिमखाना (Talimkhana);
• Kannada-कोलावलिके (Kolavalike), बलिकेल (Balikel);
• Gujrati -एखरो (Ekharo), आखो (Aakho);
• Tamil-निरमुल्ली (Nirmulli);
• Telugu-कोकिलाक्षी (Kokilakshi), कोकिलाक्षमु (Kokilaksamu), नीरुगुब्बी (Neerugubbi);
• Bengali-कुलियाखारा (Kuliakhara), कण्टकलिका (Kantakalika);
• Nepali-तालमखाना (Talamkhana);
• Panjabi-तालमखाना (Talmakhana);
• Marathi-तालीमखाना (Talimakhana), कोलसुन्दा (Kolsunda);
• English-लॉन्ग लीव्ड बारलेरिया (Long leaved barleria), तालमखाना (Talmakhana);
• Arbi-अफकीत (Afqeet)।

कोकिलाक्ष कहां पाया और उगाया जाता है ?

भारत में यह लगभग समस्त प्रदेशों के मैदानी भागों, दलदली भूमि एवं तालाब के किनारे, उष्णकटिबंधीय हिमालय में भी पाया जाता है।

Asteracantha longifolia Nees. Hygrophila spinosa T.And.Sym.ACANTHACEAE.

ENGLISH NAME:-Long Leaved Barleria. Hindi – Talmakhana

PARTS-USED:-Roots, Leaves, Seeds.

DESCRIPTION- Aspiny herb growing near moist places. Spine are yellow in whorl of Six. Leaves sessile, in whorl 6 leaves at each node Flowers bluish purple. TASTE:-Bitter.

CHEMICAL CONSTITUENTS-Seeds Contains:- Yellow Coloured Oil; Diastase, Lipase, Protease, Salts of Potassium; Mucilage.

ACTIONS:-Cooling, Diuretic, Sweet, Spermopoietic, Galactogogue, Tonic.

USED IN:-Dropsy, Disuria, Cystitis, Jaundice, Gout, Oedema, Liver disorder, Calculii.

Eye trouble.

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