– टूटेगी 84 सालों की परंपरा
-गाजा बाजा नहीं बजेगा
रांची: कोरोना वायरस को लेकर इस वर्ष हरिमति मंदिर में पूजा सादगी से हो रहा है. मां की प्रतिमा 4.5 फीट की होगी. पंडाल का आकार छोटा होगा, कोई तामझाम नहीं. गाजा-बाजा भी नहीं होगा. भोग व प्रसाद का वितरण नहीं किया जायेगा.
ढोल ढांक मात्र तीन रहेंगे. वो भी मां के भोग के दौरान ही बजेंगे. पूजा की तैयारी शुरू कर दी गयी है. कोरोना वायरस को लेकर हरिमति मंदिर का 84 साल की परंपरा इस बार टूट रही है.
प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन होगा:
कोरोना काल को लेकर प्रशासन द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों का अक्षरश: पालन किया जायेगा. सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन कराया जायेगा. पंडाल में सैनिटाइजर की व्यवस्था की जायेगी. बगैर मास्क के किसी को भी इंट्री नहीं होगी. विसर्जन शोभायात्रा में भी प्रशासन के निर्देशों का पालन किया जायेगा.
मात्र पांच लोगों से शुरू हुई थी पूजा:
वर्द्धमान कंपाउंड स्थित हरिमति मंदिर का इतिहास 84 साल पुराना है. यहां वर्ष 1935 से दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है. मात्र पांच लोगों से यहां पूजा आरंभ हुई थी. आज ये वटवृक्ष का रूप ले लिया है.
100 से अधिक इस मंदिर के सदस्या हैं. खपरैल का घर बनाकर पूजा आरंभ किया गया था. वर्ष 1992 में उस टूटे हुए खपरैल के घर को मंदिर का रूप दिया गया.
50 सालों से यहां बज रहा है ढाक:
50 सालों से हरिमति मंदिर में ढोल-ढांक बजाने की परंपरा की शुरूआत की गयी. आदित्य माझी लगातार ढोल-ढांक बजा रहे हैं. बांकुड़ा के पुरोहित कृष्णाधन चक्रवर्ती पूजा कराते आ रहे हैं.

