रांची: मध्यस्थता केंद्र में एक दिन में चार मामले सुलझे. करीब 1 करोड़ रुपये के मामले का निपटारा इस दौरान हुआ. दोनों पक्षकार आपसी सहमति से अपने मामलों का निस्तारण करने के लिए राजी हो गये. पहले मामले में मध्यस्थता के माध्यम से दो पक्षों के बीच चल रहे पुराने विवाद को सुलझा लिया गया. इस वाद में कृष्णा सिंह द्वारा हरि शंकर उपाध्याय पर 7,85,000 रुपये के दावे से संबंधित वाद राजीव त्रिपाठी के न्यायालय में चल रहा था. उक्त वाद में मध्यस्थता के दौरान 5,00,000 रुपये का भुगतान करने के लिए हरि शंकर उपाध्याय द्वारा सहमति जताई गई. कृष्णा सिंह समझौते के बाद हरिशंकर उपाध्याय पर किये गये दो मुकदमे वापस लेने के लिए तैयार हो गये. इस तरह दोनों पक्षों के बीच दो मुकदमा का निष्पादन मध्यस्थता के माध्यम से किया गया. उक्त वाद को सुलझाने में विशेषज्ञ मध्यस्थ पीएन सिंह और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं का भी सराहनीय योगदान रहा.
दूसरा मामला जमीन विवाद का था. इसमें दोनों पक्ष उपस्थित हुए और उनके वाद को सुलझा लिया गया. उक्त वाद में द्वितीय पक्ष के द्वारा 75 लाख रुपये प्रथम पक्ष को जमीन के लिए दिया गया था, परंतु जमीन में विवाद आने के कारण बात आगे नहीं बढ़ पाई थी. प्रथम पक्ष द्वितीय पक्ष को 75 लाख रुपये में से 39 लाख रुपये का भुगतान कर चुका है. बाकी बचे 36 लाख रुपये का भुगतान प्रथम पक्ष द्वारा द्वितीय पक्ष को आज की तिथि में नकद और चेक के माध्यम से किया जाएगा. उक्त वाद को सुलझाने में मध्यस्थ कृष्ण रंजन एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं का भी भूमिका रही.
तीसरा मामला मध्यस्थता के लिए अधिवक्ता मध्यस्थत नीलम शेखर को सौंपा गया. इसे भी सुलझा लिया गया. इसे सुलझाने में अधिवक्ता मध्यस्थत नीलम शेखर एवं दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं में अभिषेक कुमार एवं अनिल कुमार सिंह का भी योगदान रहा.
चौथे मामला मारपीट से संबंधित था. आवेदक राजीव कुमार सिंह और सूचक महावीर महतो द्वारा सदर (मेसरा) थाना में एक दूसरे पर मामला दर्ज कराया गया था. दोनों पक्ष में सहमति बनी कि भविष्य में मुकदमा नहीं लड़ेंगे. दोनों वादों का निष्पादन चाहते हैं. उक्त वाद को सुलझाने में मध्यस्थत एल के गिरि की भूमिका रही.

