राहुल मेहता,
रांची: शिक्षा का मानक एक व्यापक शब्द है जिसमें शिक्षार्थी, शिक्षक, शिक्षण, अधिगम प्रक्रिया, शिक्षण परिवेश, पाठ्यक्रम, शिक्षाशास्त्र, शिक्षण परिणाम, मूल्यांकन इत्यादि शामिल हैं. इनकी प्राप्ति संज्ञान के लिए भारत सरकार ने 2018-19 में समग्र शिक्षा-स्कूल शिक्षा के लिए एकीकृत योजनाका शुभारंभ किया.
इस योजना के तहत प्री-स्कूल से बारहवीं कक्षा तक सभी स्तरों पर समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य है. लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समग्र शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों का प्रशिक्षण, अनुकूल शिक्षण वातावरण, समग्र विद्यालय अनुदान, जैसे प्रयास किये जा रहें हैं.
पुस्तकालय, खेल, शारीरिक गतिविधियों के साथ -साथ आईसीटी और डिजिटल पहल, स्कूल नेतृत्व विकास कार्यक्रम, उपचारात्मक शिक्षा आदि पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
इसके अलावा, शिक्षा के मानक को बेहतर बनाने के लिए, सरकार ने निम्न कदम उठाए हैं: –
1. आरटीई नियमों को 20 फरवरी, 2017 को संशोधित कर व्यापक बनाया गया.
2. सीखने के परिणामों में कमी की पहचान करने के लिए सर्वे में सक्षम बनाने के लिए के लिए सर्वे
3. राज्यों के उपलब्धि को आंकने के लिए 70 सूचक आधारित परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स तैयार किया गया है.
4. एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है.
5. 2022 में ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) द्वारा आयोजित किए जाने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स असेसमेंट (PISA) के कार्यक्रम में भाग लेने का निर्णय लिया गया है, जो एक योग्यता आधारित मूल्यांकन है.
6. माध्यमिक स्तर के लिए सीखने के परिणामों को अधिसूचित किया गया है.
इसके अलावा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 विभिन्न शैक्षणिक उपायों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने पर ध्यान केंद्रित करती है. शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची के अंतर्गत है; इसलिए, अधिकांश स्कूल और उनका विनियमन संबंधित राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्रों के अधिकार क्षेत्र में हैं.
शिक्षकों की भर्ती एक सतत प्रक्रिया है और सेवानिवृत्ति की वजह से और छात्रों की संख्या के आधार पर आवश्यक शिक्षकों की संख्या बदलती रहती है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यथाशीघ्र और समयबद्ध तरीके से शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने का प्रावधान है. यही नहीं शिक्षकों बको शिक्षा का केंद्र माना गया है. ऐसे में शिक्षकों के रिक्त पद चिंता का विषय है.
19 सितंबर को लोकसभा में धर्मबीर सिंह के, गैर तारांकित प्रश्न संख्या 12443 का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने बताया कि देश में 17.14% शिक्षकों के पद रिक्त हैं. चिंताजनक रूप से यह आंकड़ा झारखंड में 40.17% है.
झारखंड विकलांग जन फोरम ने सरकार के प्रयासों को अपर्याप्त बताते हुए शिक्षकों की इस कमी को भरने के लिए तीन महीने के अंदर विशेष कदम उठाने की मांग की.

