रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन भी शुक्रवार को कृषि , पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की 30.47 अरब रुपये की अनुदान मांग को ध्वनि मत से मंजूरी मिल गयी. इस मौके पर कृषिमंत्री बादल ने घोषणा की है कि तीन महीने के अंदर राज्य सरकार नई कृषि नीति बनाने में कामयाब होगी.
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार कृषि निर्यात नीति भी बनाएंगी और किसानों की समस्याओं के निदान के लिए निरंतर प्रयासरत है. कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में पिछले तीन वर्षां में फसल बीमा के एवज में बीमा कंपनियों को 466 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन इन तीन वर्षां में किसानों को फसल बीमा के एवज में मात्र 77 करोड़ रुपये का ही भुगतान हो पाया, ऐसी स्थिति में यह सहज समझा जाता सकता है कि लाभ किसे हुआ. भारत सरकार की ओर से इन बीमा कंपनियों को प्रीमियम राशि भुगतान करने के लिए बार-बार पत्र लिखती है लेकिन इन फसल बीमा कंपनियों से समय पर किसानों को कोई लाभ नहीं मिल पाता है, इसलिए राज्य सरकार ने किसान राहत कोष बनाने का निर्णय लिया है.
उन्होंने यह जानकारी दी कि धान खरीद के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में किया गया है. उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकार धान क्रय को लेकर किसानों को प्रति क्विंटल 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी देगी.
बादल ने कहा कि वे खुद एक किसान के बेटे है, किसानों के दुःख दर्द से वाकिफ है. बताया कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में गठित सरकार ने किसानों की कर्ज माफी का काम शुरू कर दिया है, किसानों की समस्याओं के निदान के लिए विभाग की ओर से कई कदम उठाये जा रहे है. कर्जमाफी के लिए बजट में भी 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
कृषि मंत्री ने बताया कि कॉपरेटिव घोटाले की शिकायत मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गयी है, जांच के बाद किसी भी दोषियों को बख्शा नहीं जाएगी. उन्होंने ओलावृष्टि के संबंध में विभिन्न सदस्यों की ओर से उठाये गए सवाल का जवाब देते हुए बताया कि पलामू, गढ़वा, लातेहार और बोकारो जिले में ओलावृष्टि से आलू और अन्य फसलों को नुकसान होने की सूचना मिली है. इस संबंध में संबंधित जिलों के उपायुक्त से नुकसान का आकलन कर तत्काल आपदा राहत कोष से मुआवजा भुगतान सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने बताया कि स्पेशल आर्गेनिक खेती को लेकर भी कार्ययोजना तैयार की गयी है.

