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प्रदेश कांग्रेस के 5 कार्यकारी अध्यक्ष संगठन के लिए बने परेशानी का सबब

by bnnbharat.com
December 24, 2020
in समाचार
‘स्पीक अप फॉर डेमोक्रेसी’ कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का लगाया आरोप
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अलग-अलग वजहों से विवाद में पड़े

रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पांच कार्यकारी अध्यक्ष संगठन को मजबूत बनाने की जगह पार्टी के लिए परेशानियों का सबब बन गये है. अलग-अलग वजहों से प्रदेश कांग्रेस के पांचों कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, इरफान अंसारी, राजेश ठाकुर, मानस सिन्हा और संजय लाल पासवान विवादों से घिरे नजर आ रहे है. एक सरकारी गेस्ट हाउस में शराब पीकर हंगामा करने के मामले में दो कार्यकारी अध्यक्षों मानस सिन्हा और संजय लाल पासवान को प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव के निर्देश पर  शोकॉज भी जारी किया गया है. जबकि एक कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक के बड़बोलेपन पर पार्टी के ही कई विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए संयम बरतने की सलाह दी है. वहीं दो अन्य कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और राजेश ठाकुर के कामकाज के तरीके को भी पार्टी के कुछ नेता संगठन के लिए नुकसानदेह बताते है.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि विधानसभा चुनाव चुनाव के दौरान ही कार्यकारी अध्यक्ष संजय लाल पासवान ने एक होटल में शराब पीकर प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह के खिलाफ जमकर अपशब्दों का प्रयोग किया, जिसका ऑडियो भी तब वायरल हुआ था. लेकिन चुनाव के वक्त की नजाकत को भांपते हुए प्रभारी ने सिर्फ उन्हें डांट-फटकार लगाकर मामले को खत्म कर दिया. इसी दौरान पलामू जिले में होटल में ठहरने को लेकर वहां के जिलाध्यक्ष से भी संजय लाल पासवान कहासुनी से भी उनकी काफी किररि हुई थी.

वहीं दूसरे कार्यकारी अध्यक्ष ने जिस तरह से पार्टी नेतृत्व के फैसले के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर भावनाथपुर विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल कर दिया, उससे पार्टी की काफी फजीहत हुई, लेकिन बाद में सह प्रभारी उमंग सिंघार के काफी मान-मनौवल से उन्होंने नामांकन वापसी ली और संगठनात्मक कार्रवाई से वे बच सके. बाद में सरकार गठन होने पर शपथ ग्रहण समारोह के लिए पास वितरण को लेकर भी जगदीश साहू से उनकी हाथापाई हुई थी, जिसके बाद नेताओं को चिकित्सकों के पास भी जाना पड़ा था.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चौथे अध्यक्ष राजेश ठाकुर पर सबसे बड़ा आरोप संगठन के नाम पर लाइजिंग का आरोप लगता रहा है. कुछ जानकार नेता यह बताते है कि सरकार से बात कर इन्होंने कई पदाधिकारियों का पदस्थापन भी करवाने में सफलता हासिल की है. वहीं ये प्रदेश प्रभारी के नाम पर कार्यकर्त्ताओं-नेताओं की बात तो दूर मंत्रियों को भी हटाने और बनवाने का भी दावा करते है. जबकि प्रदेश मीडिया प्रभारी रहने के दौरान इनसे 14 प्रवक्ताओं की टीम भी नहीं संभल पाती है. पिछले दिनों  रांची दौरे के क्रम में प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह को प्रवक्ताओं की बैठक बुलाकर हस्तक्षेप करना पड़ा था.

तीसरे प्रदेश कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष केशव महतो के बारे में यह  कहा जाता है कि आज भी ये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव की जगह कांग्रेस छोड़ कर आजसू में शामिल हुए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू के साथ खड़े नजर आते हैं. कई मौके पर केशव महतो कमलेश ने प्रदेश अध्यक्ष का साथ देने की जगह पल्ला झाड़ने का काम किया. इनके खिलाफ भी संगठन के कुछ नेता आजसू पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो से उनकी नजदीकी को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. वहीं मुख्यालय प्रभारी होने के नाते उनके कामकाज से नाराज कई नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष से भी शिकायत की है. पार्टी नेताओं का कहना है कि उनकी नासमझी और सांगठनिक पद के लिए अक्षमता की वजह से से ही पिछले एक वर्ष के दौरान संगठन को विस्तार काम जोर नहीं पकड़ पाया है.

पांचवें प्रदेश कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक  इरफान अंसारी के बड़बोलेपन से तो पार्टी के ही कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से बयान देकर नाराजगी जाहिर करने का काम किया है. कुछ कांग्रेस नेताओं ने तो इन्हें भाजपा का ही एजेंट करार दे डाला है.

बताया गया है कि बुधवार को रांची में कांग्रेस विधायकों की हुई बैठक में भी इरफान अंसारी द्वारा अपने ही मंत्रियों पर लगातार सवाल उठाये जाने का मुद्दा छाया रहा. पार्टी के लगभग एक दर्जन विधायकों ने इरफान अंसारी द्वारा पार्टी के ही मंत्रियों के खिलाफ की जा रही बयानबाजी को गंभीरता से लिया है और यहां तक कह डाला कि कहीं इरफान अंसारी भाजपा के एजेंट के तौर पर तो नहीं काम कर रहे है. उन्हें पार्टी के द्वारा कई बारदायरे में रहकर बयानबाजी करने की हिदायत दी गयी है. इसके बावजूद वे मंत्रियों के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे है.

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