INTERNATIONAL WEB CONFERENCE
“PERSPECTIVE ON AGRICULTURE AND APPLIED SCIENCE IN COVID -19 SCENARIO (PAAS-2020) का शुभारंभ 4 अक्टूबर से हुआ. इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में देश दुनिया की कई यूनिवर्सिटी तथा लोगो ने भाग लिया जैसे बांग्लादेश , मलेशिया , इंडोनेशिया, इजिप्ट, सऊदी etc. इस इंटरनेशनल वेब कॉन्फ्रेंस में कुल 721 ऑथर्स ले अपना अपना लीड पेपर्स सबमिट किया और प्रेजेंटेशन के माध्यम से सबो को अपने अपने रिसर्च के बारे में बताया कि कैसे इससे एग्रीकल्चर को फायदा हो सकता है . इन सात सो इकीस ऑथर्स में से एक झारखंड के भूंगरु “पानी की खेती” को भी जगह दी गई और one ऑफ the प्रोमिनेन्ट स्पीकर में रखा गया , भारत से ले कर इजिप्ट तक सभी देशों ने झारखंड के भूंगरु “पानी की खेती” पद्धति के बारे में भूंगरु के इन्नोवतोर राजा बागची तथा रथीन भद्रा से बहुत ही बारीकी से समझा और कई सवाल भी किये और इस पद्धति से हो रहे फायदे के बारे में जान कर काफी इस भूंगरु पद्धति की काफी प्रसंशा किया और इससे “BOON FOR FARMERS” की संगायन दिया और इससे AGRICULTURAL & ENVIRONMENTAL TECHNOLOGY DEVLOPMENT SOCIETY ने अपने सोविनियर के पेज नंबर 27,28 तथा 29 में भी लिखा.
कई देशों के एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज इस पद्धति को बढ़ावा देने की बात भी कही और टीम भूंगरु (राजा बागची / रथीन भद्रा) को आमंत्रित भी किया.
अपने प्रेजेंटेशन में भूंगरु के इन्नोवतोर राजा बागची ने बताया कि किशन आज क्यों आत्महत्या करने पे मजबूर है उन्होंने बताया कि चुकी अत्यधिक erratic बारिश के कारण खेतो में जल जमाव हो जा रहा है जिसके कारण किसानों की खड़ी फसल नष्ट हो जा रहे है और पानी के कमी के कारण रवी का भी फसल नही ऊगा पा रहे है जिस के कारण उनके पास और कोई विकल ही नही बाख रहा है कर्ज चुकाने के या तो वे रोज लेबर बन शहर की ओर पलायन कर रहे है या फिर आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे है पर अगर इन जल जमाव वाले खेतो के आस पास कही भी भूंगरु होता तो अपने सक्शन और इंजेक्शन टेक्नोलॉजी से सारा जल जमाव वाल पानी को सक कर लेता और उसे हंगरी स्टारटा में संचय कर लेता इससे किसानों की खाड़ी फसल बर्बाद होने से बच जाता और भूंगरु के माध्यम से रवि के फसल के लिए भी पानी प्राप्त करता , इससे किसानों को साल में दो फसल का लाभ मिलता और उनकी आय भी दुगुनी हो जाती तो फिर क्यों कोई किसान आत्महत्या करेगा या पलायन करेगा .
राजा बागची ने बताया कि एक भूंगरु से करीब 40 लाख लीटर से ले कर 4 करोड़ लीटर तक जल संचयन किया जा सकता है और जितना भी काम भूंगरु ने झारखंड में किया है सभी जगहों पर करीब करीब एक से डेढ़ करोड़ लीटर का कैचमेंट मिला है सिम्पल भाषा मे अगर कहे तो एक तालाब में 15 से 20 लाख लीटर पानी होता है और जब भूंगरु डेढ़ करोड़ लीटर की बात करता है तो करीब करीब एक भूंगरु दस तालाब को हंगरी starta में संचय करता है और जब इतना पानी जमीन के अंदर रहता है तो इसका मॉइस्चराइजर ऊपर आता है और बंजर जमीन भी उपजाऊ हो जाती है और खेतों में नमी बरकरार रहती है इससे “CLIMATE CHANGE MITIGATION” भी कहते है . भूंगरु के डायरेक्टर रथीन भद्रा ने प्रेजेंटेशन देते हुए दुनिया को साइंटिफिक तरीके से जल संचयन करना चाहिए जिससे कि सही में फायदा हो जल संचयन का और उन्होंने पूरी दुनिया को आगाह किया कि अगर हम अब भी नही चेते और भूंगरु जैसे साइंटिफिक जल संचयन को नही अपनाया तो वो दिन दूर नही की पानी की त्राहिमाम हमे एक और विश्व युद्ध के तरफ़ धकेल देगा , अंत मे रथीन भद्रा ने बताया कि पानी को हम बना नही सकते है पानी को हम पैदा नही कर सकते है पानी को हम सिर्फ और सिर्फ संचय ही कर सकते है और अब समय आ गया है कि जैसे हम दाल , चावल, गेंहू, बाजरे की खेती कर रहे है वैसे ही अब हमें “पानी की खेती” भी करनी ही होगी.


