BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

74 साल पहले एक बम धमाके से इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया पूरा शहर

by bnnbharat.com
August 6, 2019
in समाचार
74 साल पहले एक बम धमाके से इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया पूरा शहर
Share on FacebookShare on Twitter

6 अगस्त,1945 अमरीका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया। अमरीका के एक हवाई जहाज़ ने जापान के हिरोशिमा शहर पर पहला परमाणु बम गिराया। अमरीकी राष्ट्रपति हैरी. एस. ट्रूमैन ने अटलांटिक महासागर में “आगस्ता” जहाज़ी बेड़े से यह घोषणा करते हुए कहा है कि यह बम 20 हज़ार टन की क्षमता का था और अब तक इस्तेमाल में लाए गए सबसे बड़े बम से दो हज़ार गुना अधिक शक्तिशाली था। हिरोशिमा जापानी सेना को रसद की आपूर्ति करने वाले कई केंद्रों में से एक है।

हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम को अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डेलानो रूज़वेल्ट के सन्दर्भ में “लिटिल ब्वाय” गिराया था। यहां पर ये बम 6 अगस्त 1945 की सुबह अमेरिकी वायु सेना ने गिराया था। इस बम धमाके से हिरोशिमा में  20,000 से अधिक सैनिक मारे गए, लगभग डेढ़ लाख सामान्य नागरिक मारे गए। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा शहर पर 6 अगस्त 1945 को सवा आठ बजे अमेरिका ने परमाणु बम गिराया। इस हमले में करीब 80 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। शहर के 30 फीसदी लोगों की मौत तत्काल हो गई थी। वहीं, परमाणु विकिरण के कारण हजारों लोग सालों बाद भी अपनी जान गंवाते रहे।

6 अगस्त, 1945 को हिरोशिमा पर यूरेनियम वाला पहला परमाणु बम गिरा कर ट्रूमैन ने जता दिया कि वे जापान का कैसा विध्वंस चाहते हैं। सुबह आठ बज कर 16 मिनट पर ज़मीन से 600 मीटर ऊपर बम फूटा और 43 सेकंड के भीतर शहर के केंद्रीय हिस्से का 80 फीसदी नेस्तनाबूद हो गया। 10 लाख सेल्शियस तापमान वाला आग का एक गोला तेज़ी से फैला, जिसने 10 किलोमीटर के दायरे में आई हर चीज को राख कर दिया। शहर के 76,000 घरों में से 70,000 तहस-नहस या क्षतिग्रस्त हो गए। 70,000 से 80,000 लोग तुरंत मर गए।

हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम के कारण 13 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में तबाही फैल गई थी। शहर की 60 प्रतिशत से भी अधिक इमारतें नष्ट हो गईं थीं। उस समय जापान ने इस हमले में मरने वाले नागरिकों की आधिकारिक संख्या 118,661 बताई थी। बाद के अनुमानों के अनुसार हिरोशिमा की कुल 3 लाख 50 हज़ार की आबादी में से 1 लाख 40 हज़ार लोग इसमें मारे गए थे। इनमें सैनिक और वह लोग भी शामिल थे जो बाद में परमाणु विकिरण की वजह से मारे गए, बहुत से लोग लंबी बीमारी और अपंगता के भी शिकार हुए। यह बम स्थानीय समयानुसार 8.15 बजे “इनोला गे” कहे जाने वाले एक अमरीकी विमान बी-29 सुपरफोर्ट्रेस से गिराया गया।

1939 के सोवियत-जापानी सीमा-संघर्ष के बाद 13 अप्रैल, 1941 को दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों तक एक-दूसरे पर आक्रमण नहीं करने की संधि की थी लेकिन दो महीने बाद ही जब सोवियत संघ जर्मन आक्रमण का शिकार बना तो उसे हिटलर-विरोधी मित्र राष्ट्रों के गुट में शामिल होना पड़ा। इस दौरान उसने मित्र देशों को यह आश्वासन दिया कि ज़रूरत पड़ने पर वह सुदूरपूर्व में जर्मनी के साथी जापान के विरुद्ध मोर्चा खोलने से नहीं हिचकेगा। यह दुविधा जापान के साथ भी थी कि वह एक ऐसे देश के साथ अनाक्रमण संधि कैसे निभाए जो उसके परम मित्र जर्मनी के साथ युद्ध में है। सोवियत संघ ने 5 अप्रैल, 1945 को जापान के साथ अनाक्रमण संधि से अपना हाथ खींच लिया। पोट्सडाम शिखर सम्मेलन के समापन के तुरंत बाद सोवियत संघ ने 8 अगस्त, 1945 को जापान अधिकृत मंचूरिया पर आक्रमण कर दिया।

25 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन ने फिलिप्पीन सागर में स्थित तिनियान द्वीप पर तैनात अमेरिका की प्रशांत महासागरीय वायुसेना के मुख्य कमांडर को पोट्सडाम से ही आदेश दिया कि तीन अगस्त तक इस विशेष बम के इस्तेमाल की तैयारी कर ली जाए। जिस विशेष बम ‘लिटिल बॉय’ को 3 अगस्त को गिराने की बात ट्रूमैन कर रहे थे वह यूरेनियम बम था। लेकिन इसके साथ ही एक दूसरा बम ‘फैट मैन’भी तैयार हो रहा था। यह प्लूटोनियम बम था जिसे ‘ट्रिनिटी’परीक्षण के दो सप्ताह बाद तैयार कर लिया गया था। इसका पूर्ण परीक्षण अभी बाकी था। यह जानने के लिए कि दोनों में से कौन कितना खतरनाक और संहारक है। दोनों प्रकार के बम जापान के दो शहरों में गिराए जाने थे। इसके लिए जापान के चार शहरों की सूची तैयार की गई इसमें हिरोशिमा के अलावा कोकूरा, क्योतो और निईगाता के नाम शामिल थे। नागासाकी अमेरिका के निशाने पर नहीं था. लेकिन अमेरिका के तत्कालीन युद्धमंत्री स्टिम्सन के कहने पर जापान की पुरानी राजधानी क्योतो का नाम संभावित शहरों की सूची से हटा कर उसकी जगह नागासाकी का नाम शामिल कर लिया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन अब जापान को सबक सिखाना चाहते थे। 16 जुलाई वाले सफल परमाणु परीक्षण के बाद वे जापान को अकेले ही धूल चटाना चाहते थ। 26 जुलाई, 1945 वाली अपनी पोट्सडाम घोषणा में उन्होंने कहा कि हमारी संपूर्ण सैन्य शक्ति और दृढ़निश्चय का अर्थ है जापानी सेना का विनाश। जापान पर पूरी तरह क़ब्ज़ा कर लिया जाएगा, उसके नेताओं को अपदस्थ और तहस-नहस कर दिया जाएगा। लोकतंत्र की स्थापना होगी और युद्ध-अपराधियों को दंडित किया जाएगा।

– इस हमले के बाद 2 लाख लोगों पर आज भी रेडिएशन का असर बाकी है।

– यूएस एयरफोर्स के जवानों ने हमले से पहले लोगों को चेतावनी देने के लिए पर्चा गिराया था।

– परमाणु हमले में कुछ पुलिसवालों ने अपनी जान एटॉमिक चमक दिखने के बाद खास तरीके से छुपकर बचाई थी। इस प्रक्रिया को ‘डक एंड कवर’ कहा जाता है। इन पुलिसवालों ने नागासाकी जाकर बचाव के इस तरीके की जानकारी दी, जिससे नागासाकी परमाणु हमले में काफी लोगों ने अपनी जान बचाई।

– हमले के कारण शहर के 90 फीसदी डॉक्टर मारे गए थे इस कारण घायल होने वालों का इलाज जल्द से जल्द संभव नहीं हो पाया था, इस वजह से मरने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ।

– धमाके से 3900 डिग्री सेल्सियस तापमान गर्मी और 1005 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी पैदा हुई। इस बम में 6.4 किलोग्राम प्‍लूटोनियम था।

– नागासाकी शहर के पहाड़ों से घिरे होने के कारण केवल 6.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ही तबाही फैल पाई। लगभग 74 हजार लोग इस हमले में मारे गए थे, इतनी ही संख्या में लोग घायल हुए थे।

जानिए हिरोशिमा परमाणु हमले से सबंधित महत्वपूर्ण बातें: 

– लिटल बॉय का वजन 9700 पाउंड (4400 किलोग्राम), लंबाई 10 फुट औक व्यास 28 इंच था।

– इस बम के कारण लगभग 4,000 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी पैदा हुई थी।

– बम हिरोशिमा के तय जगह पर नहीं गिराया जा सका था, यह हिरोशिमा के आइयो ब्रिज के पास गिरने वाला था मगर उल्टी दिशा में बह रही हवा के कारण यह अपने लक्ष्य से हटकर शीमा सर्जिकल क्लिनिक पर गिरा।

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

बम हमले में 2 सैनिकों की मौत : पाकिस्तान

Next Post

कश्मीर में कोई हिंसक वारदात नहीं, स्थिति शांतिपूर्ण : जम्मू एवं कश्मीर डीजीपी

Next Post
कश्मीर में कोई हिंसक वारदात नहीं, स्थिति शांतिपूर्ण : जम्मू एवं कश्मीर डीजीपी

कश्मीर में कोई हिंसक वारदात नहीं, स्थिति शांतिपूर्ण : जम्मू एवं कश्मीर डीजीपी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d