रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस निगरानी (कोविड-19) समिति की बैठक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव की अध्यक्षता में हुई. रांची स्थित प्रदेश कार्यालय के नियंत्रण कक्ष में हुई बैठक में पार्टी की ओर से चलाए जा रहे राहत कार्यों की समीक्षा हुई और राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए फोन कॉल के आधार पर मदद उपलब्ध कराई गई.
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने बाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद, विधायक और अन्य नेतागण यह जोर शोर से प्रचार में जुटे हैं कि केंद्र सरकार की ओर से करोड़ों रुपयों की मदद झारखंड को दी जा रही है लेकिन सच्चाई यह है कि कोविड-19 आपदा राहत के नाम पर केंद्र सरकार की ओर से अब तक झारखंड को सिर्फ 284 करोड रुपए ही उपलब्ध कराए गए हैं.
उन्होंने बताया कि संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार की ओर से हर परिवार को अनाज उपलब्ध कराने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं. इसके अलावा संकट की इस घड़ी में लोगों तक अनाज और स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना ,देश के दूसरे हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों छात्र-छात्राओं, मरीज एवं उनके परिवार वालों को भी मदद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. इसके अलावा लाक डाउन समाप्त होने के बाद लाखों लोग वापस लौटेंगे उनके लिए क्वारंटाइन सेंटर में रहने की व्यवस्था और कोरोना जांच का भी इंतजाम करना है ,ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा मात्र 284 करो रुपए की सहायता नाकाफी है.
डा. उरांव ने कहा कि भाजपा की ओर से यह भी जोर शोर से ढोल पीटा जा रहा है कि झारखंड को निशुल्क अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है जबकि सच्चाई यह है कि भारतीय खाद्य निगम से अनाज के उठाव और फिर डीलरों के माध्यम से उसके वितरण में राज्य सरकार को करीब ₹84करोड़ का वाहन करना पड़ रहा है. ऐसी स्थिति में भाजपा नेताओं का यह कहना कि अनाज पूरी तरह से निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है सच्चाई से परे है. उन्होंने कहा कि वे यह भी नहीं कहना चाहते कि केंद्र सरकार की ओर से कोई राहत नहीं उपलब्ध कराई गई है बल्कि यह कहना ज्यादा उचित होगा कि केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई सहायता राशि काफी कम है और झारखंड जैसे पिछड़े राज्यों को विशेष पैकेज दिया जाना चाहिए.
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा के नेता सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अपने घर में बैठकर उपवास कर रहे हैं. इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो वह खुद ही समझ सकते हैं, लेकिन यदि वे राजभवन के समझ बैठकर उपवास करते तो लोग भी देख पाते कि वह इतने देर तक भूखे उपवास कर रहे हैं.
बैठक में समिति के सदस्य प्रदीप तुलसियान, आलोक कुमार दुबे, राजेश और लाल किशोर नाथ शाहदेव भी उपस्थित थे.

