नई दिल्ली: इस समय पूरा देश कोरोना संक्रमण के महासंकट से गुजर रहा है. हर किसी में इस जानलेवा वायरस का डर बैठा हुआ है. ऐसे में संक्रमितों से रिश्ते निभाना बड़ा इम्तिहान साबित हो रहा है. ऐसी ही एक घटना देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स में घटी, जब एक 9 महीने के बच्चे की कोरोना से मौत हो गई.
बच्चा बीमार था तो माता पिता ने उसे एम्स अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया. जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई. बच्चे की कोरोना जांच की गई तो पता चला कि वो संक्रमित था. इसकी खबर जब उसके माता पिता को लगी तो वो उसके शव को अस्पताल में ही छोड़ गए.
अस्पताल प्रशासन की ओर से जब बच्चे के माता-पिता को शव ले जाने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया. उन्होंने अस्पताल प्रशासन से कहा कि वही लोग उसका अंतिम संस्कार कर दें. बच्चे के माता-पिता रामपुर के रहने वाले थे. बच्चे के सिर में जन्म से ही गांठ थी. जिसका ऑपरेशन होना था.
रूटीन चेकअप के लिए रामपुर के अस्पताल गए माता-पिता को कहा गया कि वो बच्चे को तुरंत दिल्ली में एम्स अस्पताल में ले जाएं. यहां बच्चे की मौत हो गई और उसके कोरोना संक्रमण के बारे में पता लगा तो माता-पिता उसे अस्पताल में लावारिस छोड़ आए.
बच्चे के पिता ने एम्स प्रशासन को लिखकर दे दिया कि वो उसका अंतिम संस्कार कर दें. इसके बाद एम्स अस्पताल प्रशासन की ओर से बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

